गाजियाबाद में बंदरों का आतंक, सीएचसी में रोज पहुंच रहे 100 घायल

हमले में दो लोगों की हो चुकी है मौत

गाजियाबाद ब्यूरो। गाजियाबाद के मोदीनगर में बंदरों के आतंक ने लोगों को परेशान होने पर मजबूर कर दिया है। नगर पालिका प्रशासन से बार-बार लोग बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। लगातार कस्बे में बढ़ रही बंदरों की संख्या के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। बच्चों ने घर के बाहर और छत पर खेलना बंद कर दिया है। हर रोज बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों और महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रतिदिन 75 से 100 मरीज बंदरों और डॉगी के हमले से पीड़ित पहुंच रहे हैं।बंदरों का आतंक इस कदर है कि अचानक बंदरों के हमले से छत पर टहल रहे लोगों की गिरने से मौत हो चुकी है। गोविंदपुरी डबल स्टोरी और भूपेंद्रपुरी में छत पर टहल रहे दो व्यक्तियों की बंदरों के हमला बोलने पर गिरने से मौत हुई है। बंदरों को पकड़ने के लिए लोगों ने नगर पालिका परिषद से मांग की गई थी और हंगामा भी किया, लेकिन कुछ दिन शोर मचा और मुद्दा फिर ठंडा पड़ गया।
शहर की कोई ऐसी कॉलोनी नहीं है, जहां दिन निकलते ही बंदरों का झुंड न दिखाई दे। नई कॉलोनी, देवेंद्रपुरी, उमेश पार्क, तेल मिल गेट कॉलोनी में पूरे दिन बंदर छत और दीवारों पर बैठे रहते हैं। विरोध करने बंदरों का झुंड हमला कर देता है। नई कॉलोनी में रोजाना बंदरों के हमले से कोई न कोई घायल हो रहा है। खासकर बुजुर्ग एवं बच्चे बंदरों का शिकार हो रहे हैं। नगर पालिका परिषद से लगातार शहरवासी बंदरों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं। एक साल पहले नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन पीपुल्स फॉर एनिमल्स की एक संस्था के विरोध पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
बंदरों की बढ़ रही संख्या के चलते गलियों में लोगों का निकला मुश्किल हो गया है। बंदरों की टोलियां घरों में घुसकर घर में रखा सामान उठा कर ले जाती हैं। बंदरों के डर से गलियों में, छतों पर बच्चे नहीं खेलते हैं। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करती हैं। बंदर छतों पर सूखने वाले कपड़े ले जाते हैं।
बंदरों के आतंक से गली-मोहल्लों में छोटी-छोटी किराना की दुकान करने वाले परेशान हैं। दुकानदार की मौजूदगी में बंदर हमला बोलते हैं और कोई न कोई सामान उठाकर ले जाते हैं। गोविंदपुरी क्षेत्र के दुकानदारों ने बंदरों के डर के कारण दुकानों के बाहर लोहे का जाल लगवाना शुरू कर दिया है। इससे दुकान दिखनी बंद हो गई और दुकानदारी पर फर्क पड़ने लगा।
बंदरों के आतंक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सीएचसी में हर रोज 75 से 100 केस आते हैं जिन्हें बंदरों ने काटा हुआ है। बंदर के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. कैलाश ने कहा कि जो केस अस्पताल में हैं उनमें से अधिकांश बंदरों के काटे हैं। कुछ केस कुत्ते के काटने के भी रहे हैं। मरीजों के लिए अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। गली में बिजली के तारों पर बंदर झूलते रहते हैं। कई बार तारों के जरिए मकान के मुख्य गेट में खुली जगह से अंदर पड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कई बार मकान के गेट पर लगा बिजली का मीटर टूट जाता है। पालिका से अनेकों बार बंदरों को पकड़ने की मांग की जा चुकी है।

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