इंडियन काउंसिल ऑफ़ ह्यूमन राइट्स (एनजीओ) द्वारा मानवाधिकार जागरूकता के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की समीक्षा रिपोटों में दिशा निर्देश दिये जाने की अपील
Appeal to issue guidelines in the review reports of the work being done by the Indian Council of Human Rights (NGO) in the field of human rights awareness

लखनऊ/एजेंसी। इंडियन काउंसिल ऑफ़ ह्यूमन राइट्स (एनजीओ) द्वारा मानवाधिकार जागरूकता के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की समीक्षा रिपोटों में दिशा निर्देश दिये जाने की अपील करते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ़ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव एवं इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट एसी कपूर ने कहा कि आप द्वारा अवष्य ही राज्यों में गठित मानवाधिकार आयोगो मे ईकाइयों की कार्यप्रणाली में सुधार हेतु एनजीओ द्वारा की जा रही कार्य वाहियो पर जवाब देही के साथ साथ शिकायतों पर जाॅच व निस्तारणों की रिपार्ट पर सुझाव, कार्यवाही हेेतु निर्देष जारी करेंगे जिसकी महती आवश्यकता है। जिसकी खुलासा आम नागरिकों को भी होना आवश्यक है जो मानवाधिकार जागरूकता विषय विशेष के अन्तर्गत प्रभावी बनकर उभरेगा।
अधोलिखित कार्यरत एनजीओ के कार्यरत् व सेवा, सुरक्षा, संस्कार- मानवाधिकार के न्याय दिलाने के संकल्पों के उद्देश्यों की पूर्ति व जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिये निम्न लिखित बिन्दु विचारणीय है-
मानवाधिकार अपील का विवरणः-
1) भारतीय संविधार में प्रदत्त अनुच्छेदों विशेषतया 19, 21 व 14 के साथ 32 का सीधे जुड़ाव राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उत्पीड़न से संरक्षण 1993 अधिनियम से होने के कारण पीड़ितों के उत्पीड़नों की जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिये छळव् को जांच को शामिल किया जाना महती आवश्यकता है जो मौलिक अधिकरों से अलग संबैधानिक कानूनी प्रक्रियाओं का अभिन्न अंग मान्य होगा। जिसमें पक्षकारों के बयानों, आरोपित षिकायतों में संकलन साक्षयों पर विषेश कार्यवाही होना मामलों के निस्तारण का प्रबल कारण होगा। एनजीओ अन्तिम रिपोर्ट पर विभागीय जिम्मेदार लोक सेवको पर सत्यता के हम मे दिशा निर्देष दिया जाना छळव् को जागरूकता पर सहभागिता होना है।
2) मानवाधिकार न्यूज पत्रिका में सूची बद्धता होने के पश्चात भी छळव् को आपके कार्यालय से समयानुसार पत्रिका नही प्रेशित की जा रही है जिस कारण जागरूकात प्रभावी नहीं हो पर रही है। पत्रिका वितरण व्यवस्था को दुरूस्त किया जाये। पूर्व में अधोलिखित कार्यालय को पत्रिका व अन्य जागरूकता सामग्री प्रेशित की जाती रही है जो वर्तमान में लगभग छह माह से वितरण में अवरोध है, जिसको चालू किया जाना अति आवश्यक है।
3) मानवाधिकार कार्यक्षेत्रों में कार्यरत पंजीकृत एनजीओ के माध्यम से आपकी कार्यवाहियों का खुलासा होता रहा है, छळव् द्वारा होली मिलन, जेल से कैदियों का जुर्माना भर छुड़वाना, अस्पतालों में फल व दवाइयों के वितरण, कम्बल व जाड़ों में कपड़ो आदि का वितरण करवाना, बच्चों की लिखाई पढ़ाई में आर्थिक मदद करना, गरीब कन्याओं की शादी ब्याह करवाने में सेवा प्रदान करना आदि आदि सेवा कार्यो के साथ साथ आपातकालीन समयों पर सरकार को भी आर्थिक व शारीरिक सेवाओं द्वारा मदद पहुँचाने में भागीदारी करना मानवाधिकार जागरूकता को निरन्तर प्रभावी बनाता रहा है जिसका समय समय पर आपके कार्ययालय को भी कार्यो की रिपोर्ट प्रेषित की जाती रही है व लोकल स्तर पर प्रकाशन कर आप जनता को प्रोत्साहित करने में भी सहयोग प्रदान किया जाता है।
4) मानवाधिकार, उत्पीड़न शिकायतों व संरक्षणों से प्रभावित उच्च पदों पर आसीन न्यायिक जिम्मेदार अधिकारियो विशेषातया जनपद न्यायाधीश, जिला मजिस्ट्रट, कमिश्नर आफ पुलिस से अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु कार्यरत एनजीओ से सीधे सम्पर्क हेतु जाॅच प्रक्रिया, पक्षकारों के बयानों, साक्ष्यों के संकलन आदि आदि पर रिपोर्ट लेकर उचित कार्यवाही किये जाने के निर्देष जारी किये जाना न्याय शास्त्र व न्याय तन्त्र के साथ साथ न्याय व्यवस्था की भी महती आवश्यकता मान्य हो। जिससे अनावश्यक आत्म हत्या, जैसे गम्भीर अपराधों व झूठे आरोपित प्रार्थना पत्र पर विराम लग सके तथा भ्रष्टाचार व धन दोहन की लालसा में लिप्त भष्ट लोक सेवकों पर भी अंकुश लगाया जा सके। झूठी कार्यवाहियों में लिप्त आक्रमक अपराधियों को समय रहते दण्ड व क्षतिपूर्ति से दोषी व्यक्ति को सजा मिल सके।
अतः आपसे विशेष अनुरोध ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास भी है की अधेालिखित एनजीओ इन्डियन काउंसिल ऑफ़ ह्यूमैन राइट्स द्वारा की गई अपील में दर्शाये गये तथ्यों कारणो, साक्षयो व परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत के विकास न्याय शास्त्र, न्याय तन्त्र व न्याय व्यवस्था की कड़ी में गम्भीरता से विचचार कर अपने पद की गरिमा व संवैधानिक कर्तव्यों में कानूनों के पालन कराये जाने के लिये सक्षम लोक सेवको की कार्यवाहियो पर उचित दिशा निर्देष जारी करेंगे जिससे एनजीओ द्वारा सेवा, सुरक्षा, संस्कार, मानवाधिकार के न्याय दिलाने के संकल्प का उद्देश्य पूरा हो सके तथा अपराधों में कमी व विराम लग सके इसलिए की न्यायपलिका पर भी मुकदमेंबाजी का बोझ कम हो सके। मुकदमा अथवा मध्यस्थता को बढ़ावा मिलने की उद्देश्य की पूर्ति भी प्रबल कारण बनकर उबर सके।




