दिल्ली पुलिस की आईएफएस टीम ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लोगों को ठगने वाले 3 अपराधियों को किया गिरफ्तार

Delhi Police's IFS team arrested 3 criminals who were duping people in the name of "Digital Arrest"

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली राज्य ब्यूरो। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की आईएफएस की टीम ने डिजिटल अरेस्ट के मामले का खुलासा किया है। इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तार भी किया गया है। इसकी गिरफ्तारी से आईएफएसओ यूनिट ने एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जो आईवीआरधोखाधड़ी ( डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी) में म्यूल/फर्जी बैंक खातों के उपयोग में भी शामिल था। आरोपी फर्जी कंपनियों का उपयोग करके अपराध की कमाई को विदेश भेज रहे थे। डीसीपी डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया की इसी साल 12 सितंबर को, आईएफएसओ, स्पेशल सेल में एक शिकायत दर्ज की गई थी। जिसमें बताया गया कि 9 सितंबर, 2024 की सुबह, शिकायतकर्ता को एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को मुंबई एयरपोर्ट, टर्मिनल 2 के कस्टम कार्यालय का अधिकारी बताया। उनकी पहचान की पुष्टि करने के बाद, कॉलर ने सूचित किया कि 6 सितंबर 24 को कस्टम अधिकारियों ने एक पार्सल जब्त किया। जिसमें 16 फर्जी पासपोर्ट, 58 एटीएम कार्ड, और 40 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स बरामद हुए हैं। भेजने वाले के रूप में उस सख्स का नाम दर्ज है। इसके बाद कॉलर ने बताया कि मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है और उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा।
धोखेबाजों ने पीड़ित को और डराने के लिए यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच भी चल रही है और उनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। गिरफ्तारी की संभावना तक, उन्हें डिजिटल अरेस्ट के तहत रखा गया, जिसमें उन्हें लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से निगरानी में रखा गया। इन कॉलों के दौरान, अलग-अलग व्यक्तियों ने खुद को मुंबई पुलिस, सीबीआई और विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी बताकर उन्हें अमाउंट ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।
इन व्यक्तियों ने उनसे यह कहकर पैसे ट्रांसफर कराए कि उनके बैंक खातों की जांच के लिए यह आवश्यक है। जिससे उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से बचाया जा सके। पीड़ित को कुल 55 लाख की धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। शिकायत प्राप्त होने के बाद, धारा 318(4)/308(2)/61(2)(4)/3(5) बीएनएस और 66C/66D आईटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
एसीपी जय प्रकाश की देखरेख में इंस्पेक्टर राम निवास और सुनील कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। जिसमें एएसआई संजय, हेड कांस्टेबल राजेश, और हेड कांस्टेबल समय सिंह भी शामिल थे। टीम ने आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का विस्तृत जांच के बाद, एक फर्जी कंपनी कैमेलिया सर्विस अपार्टमेंट एलएलपी के मालिकों की पहचान की। मोबाइल और तकनीकी निगरानी की सहायता से, पुलिस ने तीन व्यक्तियों प्रभात कुमार, राजेश कुमार (उर्फ राजा) और अर्जुन सिंह को बुराड़ी से गिरफ्तार किया। प्रभात कुमार और राजेश कुमार को कैमेलिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के मालिक के रूप में पाया गया, जो ये दोनों इस कंपनी के खातो का उपयोग धोखाधड़ी से कमाई गई राशि को हेराफेरी के लिए करते थे ।
इनके पास से कंपनी के खातो की पासबुक, चेक बुक तथा कंपनी के बैनर, और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए। अर्जुन सिंह धोखाधड़ी के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने इनकी मदद करता था। जांच के दौरान, सभी बैंक खातों जिनमे धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर हुई थी की जांच की गई। कुल ठगी गई राशि में से 20 लाख एक एचडीएफसी बैंक खाते में जब्त किए गए और अदालत से पीड़ित को यह राशि वापस दिलाने का आदेश प्राप्त किया गया।
यह सिंडिकेट पुलिस, सीबीआई, कस्टम, और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करता था। वे पीड़ितों को यह बताते थे कि एक पार्सल में निषिद्ध सामग्री पाई गई है, जिसमें उनका नाम भेजने वाले के रूप में दर्ज है। शुरुआत में पीड़ितों को गिरफ्तारी और कड़ी सजा की धमकी दी जाती थी, लेकिन बाद में सहानुभूति दिखाते हुए कहा जाता था कि यह पहचान की गलती हो सकती है। पीड़ितों को मामले को हल करने के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज कराने और सत्यापन के लिए अपने सभी खातो से पैसे अन्य फर्जी खातों में ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था। उन्हें यह झूठा आश्वासन दिया जाता था कि सत्यापन के बाद उनकी राशि वापस कर दी जाएगी।
दिल्ली के रहने वाले हैं तीनों आरोपी
गिरफ्तार प्रभात कुमार शाह, बुराड़ी, दिल्ली का रहने वाला है।राजेश कुमार उर्फ राजा, बुराड़ी, दिल्ली का रहने वाला है। अर्जुन सिंह भी बुराड़ी, दिल्ली का रहने वाला है। इनसे तीन मोबाइलऔर सिम कार्ड, पासबुक, चेक बुक, दस्तावेज, 2 पैन कार्ड, और फर्जी कंपनियों से संबंधित स्टैम्प और सील, विदेशी संस्थाओं, अन्य बैंक खातों, और इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य सहयोगियों की जांच जारी है।

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