महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले हटाई गईं महाराष्ट्र की डीजीपी रश्मि शुक्ला

Maharashtra DGP Rashmi Shukla removed before Maharashtra assembly elections

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों से शिकायतें मिलने के बाद राज्य सरकार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला का तत्काल प्रभाव से तबादला करने का सोमवार को निर्देश दिया। सूत्रों ने सोमवार को बताया कि आयोग ने महाराष्ट्र की मुख्य सचिव को शुक्ला का प्रभार उनके बाद काडर के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने को कहा है। सूत्रों के अनुसार, आयोग ने मुख्य सचिव को डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए मंगलवार दोपहर तक तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजने का भी निर्देश दिया है। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को मतदान होना है।राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने 31 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को लिखे पत्र में राज्य की डीजीपी रश्मि शुक्ला को हटाने की मांग की थी। उन्होंने उन पर राज्य में विपक्षी दलों के खिलाफ स्पष्ट पक्षपात करने का आरोप लगाया था। उन्होंने उन पर पुणे के पुलिस आयुक्त और राज्य खुफिया शाखा के आयुक्त के रूप में विपक्षी नेताओं के फोन की अवैध रूप से टैपिंग करने के पिछले आरोपों को उठाया।
एक सूत्र ने कहा कि रश्मि शुक्ला को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी माना जाता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने समीक्षा बैठकों और महाराष्ट्र- झारखंड में विधानसभा चुनावों की घोषणा के दौरान पहले ही निष्पक्ष चुनाव को लेकर सब स्पष्ट कर दिया था। आयोग ने कहा था कि चुनाव संचालन में लगे वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल निष्पक्ष और निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि उनके आचरण में गैर-पक्षपाती भी माना जाना चाहिए। माना जाता है कि चुनाव आयोग ने शुक्ला में विपक्ष के अविश्वास को गंभीरता से लिया है और तत्काल प्रभाव से शुक्ला को स्थानांतरित करके किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश को खारिज करने का फैसला किया है।
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से तूल पकड़ा मामला
महाराष्ट्र चुनाव की तारीखों की घोषणा से कुछ दिन पहले, पूर्व एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पटोले ने चुनाव आयोग को लिखे अपने पत्र में आरोप लगाया था कि राज्य में पिछले कुछ दिनों में विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। उन्होंने शिकायत की थी, ‘आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद झारखंड के डीजीपी को हटा दिया गया, जबकि महाराष्ट्र के डीजीपी को छूट दी गई।’
चुनाव आयोग को नाना पटोले के तीन पत्र
शुक्ला 30 जून, 2024 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं, लेकिन उन्हें जनवरी 2026 तक सेवा विस्तार दिया गया। सीईसी राजीव कुमार ने पिछले महीने उनकी नियुक्ति को उचित ठहराते हुए कहा था कि यह विस्तार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार था। हालांकि, तब से विपक्षी दलों का दबाव बढ़ गया है। नाना पटोले ने खुद चुनाव आयोग को तीन पत्र भेजे, जिसमें राज्य पुलिस प्रमुख के रूप में उनके बने रहने पर सवाल उठाया गया।
रश्मि शुक्ला टैपिंग विवाद
रश्मि शुक्ला की नियुक्ति विवादास्पद थी क्योंकि उन्होंने पिछली भाजपा-शिवसेना सरकार के दौरान कथित तौर पर विपक्षी नेताओं के फोन टैप करने का आदेश दिया था। कहा जाता है कि शुक्ला ने तत्कालीन डीजीपी सुबोध जायसवाल को पुलिस पोस्टिंग में भ्रष्टाचार पर एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी, जो शिवसेना सांसद संजय राउत और राज्य कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं की टैप की गई फ़ोन बातचीत पर आधारित थी। फ़ोन टैपिंग के लिए बाद की एमवीए सरकार ने रश्मि शुक्ला के खिलाफ़ दो एफ़आईआर दर्ज की गई थीं। बाद में मामले बंद कर दिए गए।
जैसे-जैसे चुनाव अभियान आगे बढ़ा, शुक्ला की कार्यप्रणाली और भी ज़्यादा जांच के दायरे में आ गई। पिछले हफ़्ते, सीईसी ने एक बयान में महाराष्ट्र में राजनीति से प्रेरित अपराधों पर चिंता व्यक्त की और 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी से चुनावी माहौल को बिगाड़ने वाली और समान अवसर को बाधित करने वाली घटनाओं पर लगाम लगाने को कहा। यह बयान बड़ी मात्रा में नकदी जब्ती और कुछ झड़पों के बाद आया है। विपक्ष की चिंता को बढ़ाते हुए, शरद पवार ने पिछले हफ़्ते बारामती में कहा कि उच्च पदस्थ अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र पुलिस वाहनों का खुलेआम सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों को सहायता प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
रश्मि शुक्ला को हटवाने के लिए डटे रहे नाना पटोले
पटोले ने शुक्ला के खिलाफ पहली शिकायत 24 सितंबर को दर्ज कराई थी। उन्होंने शुक्ला को तत्काल हटाने की मांग की थी, क्योंकि उनका कहना था कि उन्हें अवैध रूप से सेवा विस्तार दिया गया है, वे अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही हैं और उनके प्रशासन में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में बाधा उत्पन्न होगी। 4 अक्टूबर को उन्होंने एक और पत्र लिखा, उसके बाद 31 अक्टूबर को एक और पत्र लिखा।
दरअसल, सीईसी के मुंबई दौरे के दौरान महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने भी उन्हें ज्ञापन सौंपा था। पवार और ठाकरे ने तबादले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर नहीं रहना चाहिए। फडणवीस ने कहा, ‘मैं चुनाव आयोग के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता…खास तौर पर शरद पवार, उद्धव ठाकरे और नाना पटोले ने इसका स्वागत किया है। जब कांग्रेस हरियाणा में हारी थी, तो उन्होंने चुनाव आयोग की आलोचना की थी, अब उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले की सराहना की है। चुनाव के बाद अगर महायुति सत्ता में बनी रहती है, तो उन्हें चुनाव आयोग के बारे में अपना नजरिया नहीं बदलना चाहिए।’

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