महाराष्ट्र में विशेष सहायक लोक अभियोजक अदालत परिसर में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार

महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी ) ने एक विशेष सहायक लोक अभियोजक (एजीपी) को अदालत परिसर के भीतर 25,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

कांती जाधव/महाराष्ट्र ब्यूरो। महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक विशेष सहायक लोक अभियोजक (एजीपी) को अदालत परिसर के भीतर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस घटना से न्यायिक व्यवस्था में भी भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ठाणे एसीबी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान भूपेश अजीत पुरंदारे के रूप में हुई है, जो वसई स्थित एक अदालत में विशेष लोक अभियोजक के रूप में कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता, जो स्वयं एक अधिवक्ता हैं, ने अपने मुवक्किल की ओर से मानिकपुर पुलिस थाने में दर्ज एक मामले में जब्त संपत्ति को वापस दिलाने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की थी।
आरोप है कि मामले में अनुकूल कार्रवाई कराने के एवज में आरोपी अभियोजक ने शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले की जांच कर जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए अदालत परिसर में ही रंगे हाथों पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार, संबंधित मामले की फाइल वसई पुलिस स्टेशन से आगे की कार्रवाई के लिए अभियोजन पक्ष को सौंपी गई थी और बाद में इसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान संपत्ति वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई थी।
एसीबी की इस कार्रवाई के बाद कानूनी महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां सख्ती से काम कर रही हैं और किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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