नई मिसाल: गाजियाबाद में बिना वकील अदालतें सुना रहीं फैसला, हड़ताल के बीच पिछले आठ दिन में 2756 केस निस्तारित

जिला जज से विवाद के बाद 29 अक्तूबर से हड़ताल पर हैं वकील

गाजियाबाद। वकीलों की हड़ताल के बीच अमूमन अदालतों का काम ठप हो जाता है, लेकिन गाजियाबाद की तस्वीर इसके उलट है। यहां कचहरी में चल रही वकीलों की हड़ताल के बीच अदालतें केसों का निस्तारण कर नई मिसाल पेश कर रही हैं। पिछले आठ दिनों में अलग- अलग अदालतों में 2756 केसों का निस्तारण हुआ।
सभी मामलों में शासकीय अधिवक्ता और वादकारी के परिजनों ने अदालत में बहस की। इस दौरान 370 मुकदमे दाखिल भी हुए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुमार मिताक्षर ने बताया कि किसी भी मामले में वादकारी खुद अपना पक्ष रख सकते हैं।
अगर वादकारी को लगता है कि वह अपना पक्ष नहीं रख सकता तो उसे वकील की जरूरत पड़ती है। आठ दिन में निस्तारित हुए ज्यादातर मामलों में वादकारियों ने खुद अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि जिन मामलों में अधिवक्ता नहीं होते हैं, उनमें प्राधिकरण डिफेंस काउंसिल को पैरवी के लिए नियुक्त करता है।
सामान्य हालात में हर दिन अदालत में चार से पांच हजार केस सुने जाते हैं और 500-600 मामलों का निस्तारण होता है। गाजियाबाद में हड़ताल से पहले 21 से 28 अक्तूबर के बीच 3,570 केसों का निस्तारण हुआ था। अदालत में 29 अक्तूबर को लाठीचार्ज के बाद वकीलों ने अदालतों में जाना बंद कर दिया। नवंबर में किसी वादकारी को अदालत में उपस्थित नहीं होने दिया था।
29 अक्तूबर को एक मामले के आरोपियों की जमानत अर्जी पर पहले सुनवाई को लेकर जिला जज और वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव के बीच नोकझोंक हुई थी। पुलिस ने वकीलों को कोर्ट रूम खाली करने को कहा था। बात नहीं मानने पर लाठीचार्ज कर दिया था। इसी के बाद आक्रोशित वकील कार्रवाई की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।

 

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