20 साल बाद घर लौटा परशुराम, पति की राह तकती रही मालती की उम्मीद हुई पूरी
बोकारो में रहने वाले एक महिला का पति 20 साल पहले मुंबई से गायब हो गया, लेकिन अब राजस्थान के एक आश्रम से मिलने के बाद घर में फिर से खुशी लौट आई है।

बोकारो/झारखंड। बोकारो थर्मल क्षेत्र के गोविंदपुर गांव में उस समय भावुक कर देने वाला माहौल बन गया, जब करीब 20 साल से लापता परशुराम महतो मंगलवार को अपने घर लौट आए। पति के लौटने की उम्मीद में दो दशक तक इंतजार करती रहीं उनकी पत्नी मालती देवी की आस आखिरकार सच साबित हुई। राजस्थान के भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम और स्थानीय पुलिस के प्रयास से परशुराम की पहचान का पता चला और उन्हें परिवार से मिलाया जा सका।
39 वर्षीय मालती देवी ने पति के लापता होने के बाद भी उनकी वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने दूसरी शादी नहीं की और वर्षों तक सुहाग के प्रतीक के रूप में सिंदूर लगाती रहीं। करवा चौथ का व्रत भी इस विश्वास के साथ रखती रहीं कि उनके पति जीवित हैं और एक दिन वापस लौटेंगे। मंगलवार को जब दो दशक बाद परशुराम उनके सामने पहुंचे तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
परशुराम महतो करीब 20 वर्ष पहले इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे। बताया जाता है कि नौकरी को लेकर तनाव के बीच वह काम की तलाश में अपने दोस्तों के साथ मुंबई गए थे। उनके साथी तो वापस लौट आए, लेकिन परशुराम घर नहीं पहुंचे। परिवार ने कई वर्षों तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। करीब पांच-छह साल तक खोजबीन के बाद परिजनों ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।
परशुराम के बड़े भाई कामेश्वर महतो ने बताया कि भाई के लापता होने के बाद परिवार ने उन्हें काफी तलाशा था। इस दौरान उनके पिता का भी निधन हो गया। मां रत्नी देवी भी बेटे को याद कर अक्सर भावुक हो जाती थीं। परिवार के लिए यह अनिश्चितता करीब दो दशक तक बनी रही।
परशुराम की कहानी मार्च 2006 में राजस्थान के कुचामन शहर से शुरू हुई। वहां मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में मिले एक व्यक्ति को भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम लाया गया। वह अपना नाम और पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे थे। आश्रम ने उनका नाम ‘प्रभुजी विष्णु’ रखा और उनका इलाज शुरू कराया। गंभीर बीमारी के लिए उनका ऑपरेशन भी किया गया।
समय के साथ स्वास्थ्य में सुधार हुआ और उनकी पुरानी यादें धीरे-धीरे लौटने लगीं। इसी दौरान उन्हें याद आया कि वह झारखंड के बोकारो के रहने वाले हैं। इस जानकारी के आधार पर आश्रम की ओर से उनकी पहचान और परिवार की तलाश शुरू की गई। स्थानीय पुलिस से संपर्क किए जाने के बाद छानबीन आगे बढ़ी और अंततः परशुराम के गांव तथा परिवार का पता चल गया।
जब बोकारो थर्मल थाने से कामेश्वर महतो को फोन कर परशुराम के मिलने की जानकारी दी गई तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ। पुलिस ने वीडियो कॉल के माध्यम से उनकी बात परशुराम से कराई। दो दशक बाद भाई को सामने देखकर कामेश्वर भावुक हो गए। परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों से भी खुशी के आंसू छलक पड़े।
इसके बाद परिजन उन्हें वापस लाने के लिए राजस्थान रवाना हुए। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद परशुराम आखिरकार अपने गांव और परिवार के बीच पहुंच गए। पति की वापसी के बाद मालती देवी के लिए यह किसी त्योहार से कम नहीं था। जिस व्यक्ति की राह उन्होंने 20 वर्षों तक देखी, वह आखिरकार उनके जीवन में लौट आया।




