सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने खुद को गोली मारी, टिकट बंटवारे में गुटबाजी के बाद अखिलेश ने छीना था पद

मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश। मुरादाबाद जिले में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष डीपी यादव का शव शनिवार को उनके बुद्धि विहार स्थित आवास पर मिला। शव कमरे में इनरवियर में बेड पर पड़ा मिला। सिर से खून बह रहा था। पुलिस का कहना है शुरुआती जांच में संकेत मिल रहे है कि यादव ने पिस्टल से खुद दी कनपटी में गोली मारी और सुसाइड किया है। साथ ही पुलिस का कहना है कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। इसलिए उन्होंने सुसाइड क्यों किया? इसकी वजह तलाशने में पुलिस जुटी है। डीपी यादव के पड़ोसी पूर्व सांसद वीर सिंह ने घटना की सूचना पुलिस दी थी। पुलिस और फोरेंसिक टीम टीम ने पूरे घर की तलाशी ली। सपा नेताओं के मुताबिक लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आठ अप्रैल को ही पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष के पद से हटाया था।
पुलिस को परिजनों ने बताया कि घटना के वक्त डीपी यादव की पत्नी सविता, बेटा अंकित और बेटी अंजलि ग्राउंड फ्लोर पर थे। बेटा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करता है। बेटी दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती है। घरवालों का कहना है कि डीपी यादव कुछ वक्त से डिप्रेशन में थे। सपा जिलाध्यक्ष जयवीर यादव का कहना है कि ने उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया? समझ में नहीं आ रहा है।
दरअसल, चुनाव के दौरान पूर्व सांसद एसटी हसन और सपा प्रत्याशी रुचि वीरा में गुटबाजी सामने आने के बाद अखिलेश ने डीपी यादव को पद से हटा दिया था। डीपी यादव की जगह उनके ही रिश्तेदार जयवीर यादव को जिलाध्यक्ष बनाया था। डीपी यादव लगातार कह रहे थे कि एसटी हसन ही सपा के प्रत्याशी हैं।
हालांकि पद से हटाए जाने के बाद डीपी यादव साफ कहा था कि पार्टी अध्यक्ष का फैसले का स्वागत है। मैं पार्टी का सिपाही हूं, कार्यकर्ता की तरह काम करता रहूंगा। पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने का बी इंतजार है। उससे भी जांच में कुछ मदद मिलेगी। परिजनों से भी कुछ जानकारी ली गई है र कुछ ली जा रही हैं।

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