यूपी में दो दर्जन सीटों का दावा करने वाले ओमप्रकाश राजभर अपने बेटे को भी नहीं जिता पाए, हवा हो गया पीडीएम

लखनऊ/एजेंसी । इस बार के लोकसभा चुनाव में जाति विशेष की राजनीति करने वाले दलों को जनता ने नकार दिया है। बार-बार पाला बदलने वाले सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर एनडीए गठबंधन में मिली एक मात्र घोसी सीट पर अपने बेटे अरविंद राजभर तक को चुनाव में नहीं जिता पाए। एनडीए की दूसरी सहयोगी निषाद पार्टी भी कोई कमाल नहीं दिखा पाई। भाजपा ने निषाद पार्टी के दो उम्मीदवारों को अपने सिंबल पर उतारा था, इनमें संत कबीर नगर से निषाद पार्टी के मुखिया के सांसद बेटे प्रवीण निषाद और भदोही से पार्टी के विधायक डा. विनोद कुमार बिंद शामिल हैं। संजय निषाद अपने बेटे को नहीं जिता पाए।
सुभासपा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर खुद को भर व राजभर की 17 जातियों का नेता बताते हैं। वह पूर्वांचल की वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, देवरिया, बलिया, मऊ, गोरखपुर सहित करीब दो दर्जन सीटों पर प्रभाव का दावा करते हैं।
एनडीए में शामिल सुभासपा की हालत इस बार ऐसी हुई कि राजभर अपने बेटे को भी घोसी पर सफलता नहीं दिला पाए। सुभासपा यहां सपा के राजीव राय से 1.62 लाख से अधिक मतों से हार गई।
यही नहीं इसके आस-पास की सीटों सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर में भी भाजपा को राजभर अपनी बिरादरी के वोट नहीं दिला पाए। निषाद पार्टी को भी इस लोकसभा चुनाव में जनता ने नकार दिया है।
निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद इस बार भी संतकबीरनगर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें सपा के लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद ने 92,170 वोटों से हरा दिया। दूसरी भदोही सीट पर डॉ. विनोद कुमार बिंद चुनाव इसलिए जीत गए क्योंकि यहां पर विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए की ओर से तृणमूल कांग्रेस चुनाव लड़ रही थी।
पीडीएम न्याय मोर्चा भी फुस्स
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के सिंबल से सिराथू सीट जीतने वाली अपना दल कमेरावादी की नेता डा. पल्लवी पटेल ने लोकसभा चुनाव से पहले सपा से नाराज होकर पीडीएम (पिछड़ा, दलित, मुस्लिम) न्याय मोर्चा बना लिया था। एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर बनाए गए इस मोर्चे को भी जनता ने नकार दिया है। मीरजापुर, वाराणसी, फूलपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, बांदा, झांसी कहीं पर भी यह मोर्चा कोई प्रभाव नहीं दिखा सका। सभी जगह इसकी जमानत जब्त हुई है।




