नए साल पर दिल्लीवासियों को मिलेगी नए रेलवे पुल की सौगात, 227 करोड़ से अधिक लागत से बना है नया पुल

227 करोड़ से अधिकजनवरी में पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन

नई दिल्ली। यमुना नदी पर ऐतिहासिक लोहा पुल के समानांतर नया रेलवे पुल बनकर तैयार हो गया है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने इस पुल का निरीक्षण भी कर लिया है। वह अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपेंगे, जिसके आधार पर पहले ट्रायल और फिर पुल का उद्धघाटन होगा। यदि कोई अड़चन नहीं आई तो जनवरी अंतिम सप्ताह या फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों इसका उद्घाटन होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से पुरानी दिल्ली से गाजियाबाद के रास्ते ट्रेन परिचालन में बेहतर होगा। गति व क्षमता दोनों बढ़ेगी। इससे विशेष रूप से पूर्व दिशा के यात्रियों को राहत मिलेगी।
अभी 150 वर्षों से अधिक पुराने लोहा पुल से धीमी गति से ट्रेनों की आवाजाही होती है। मानसून में जब यमुना उफान पर रहती है तो कई बार इसे बंद करना पड़ता है जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है। इस पुल रेल लाइन के नीचे सड़क मार्ग है। इस तरह से यह ट्रेन के साथ ही सड़क मार्ग के लिए महत्वपूर्ण है। अंग्रेजों ने वर्ष 1867 में इस पुल का निर्माण किया था।
इसकी आयु 80 वर्ष निर्धारित थी और यह 1947 में ही पूरी हो चुकी है। लेकिन, दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण इसी पुल से ट्रेनों की आवाजाही जारी है। वर्ष 2018 में लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से इसके जर्जर हिस्से से लगभग साढ़े सात सौ टन लोहा बदला गया था। उसके बाद भी जरूरत के अनुसार मरम्मत कार्य किया जाता है।
रेलवे ने वर्ष 1997-98 में यमुना पर लोहा पुल के सामानांतर एक नया पुल बनाने का निर्णय लिया था। वर्ष 2005 तक इसका निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था परंतु, इसका निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हो सका। तकनीकी व अन्य कारणों से कई बार इसका निर्माण कार्य बाधित हुआ।
पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसाआइ) की आपत्ति की वजह से निर्माण कार्य रोकना पड़ा था। प्रस्तावित निर्माण क्षेत्र में सलीमगढ़ किला का कुछ हिस्सा आ रहा था, जिसका एएसआई ने विरोध किया था। इस कारण कई वर्षों तक काम बाधित हुआ। बाद में पुल के बनावट में बदलाव कर निर्माण कार्य शूरू किया गया तो प्रस्तावित पिलर वाले स्थान पर चट्टान मिलने के कारण काम रूक गया था।
आईआईटी दिल्ली की सहायता से यह बाधा दूर करने के बाद फिर से निर्माण कार्य शुरू हुआ और जून 2019 तक इसे बनाने का लक्ष्य रखा गया था, परंतु वर्ष 2025 में बनकर तैयार हुआ। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी, वायु प्रदूषण से निर्माण कार्य पर रोक जैसे कारणों से निर्माण कार्य में देरी हुई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, डबल लाइन 865 मीटर लंबे इस पुल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह 25 टन एक्सल लोड सहन कर सकता है। यानी भारी व तेज गति वाली ट्रेन इससे गुजरेंगी। इसके निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत लगभग 137 करोड़ था। के निर्माण कार्य में देरी से यह बढ़कर 227 करोड़ से अधिक हो गया।

 

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