आजमगढ़ के ‘मृतक’ को जान का खतरा! एके-47 राइफल के लिए किया आवेदन

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। आजमगढ़ के मशहूर लाल बिहारी मृतक ने प्रशासन से एके-47 बंदूक के लाइसेंस की मांग की है। मृतक ने कहा है कि वह जिन लोगों के अधिकारियों के लिए लड़ते हैं, उसमें उनकी जान को खतरा है। ऐसे में मुख्य सचिव से निवेदन है कि मुझे एक एके-47 बंदूक का लाइसेंस दें। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि आमजनता के लिए यह शस्त्र प्रतिबंधित है लेकिन इसको एक मृतक को दिया जा सकता है। लाल बिहारी सरकारी रेकॉर्ड में 19 साल तक मृत रहे थे। बाद में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रेकॉर्ड में उन्हें जीवित दिखाया गया। उन पर पंकज त्रिपाठी के अभिनय वाली एक फिल्म भी बनी है, जिसे सतीश कौशिक ने निर्देशित किया है।
लाल बिहारी ने कहा, ‘मैं मुख्य सचिव से अनुरोध करता हूं कि मुझे एके-47 राइफल का लाइसेंस लेने की अनुमति दी जाए, क्योंकि मुझे ऐसे कई लोगों के लिए संघर्ष करने की वजह से जान का खतरा है जो जीवित हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मर चुके हैं।’ उन्होंने कहा कि वह यूपी के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रतिबंधित बंदूक के लिए लाइसेंस प्रदान करने का आग्रह करेंगे। बता दें कि भारत में कोई भी व्यक्ति लाइसेंसशुदा एके-47 नहीं रख सकता, क्योंकि यह हथियार केवल विशेष बलों के लिए है। इस पर लाल बिहारी मृतक ने बताया कि मुझे पता है कि यह अत्याधुनिक बंदूक आम जनता के लिए प्रतिबंधित है, लेकिन इसे ‘मृतक’ (मृत व्यक्ति) को दिया जा सकता है।
लाल बिहारी साल 1975 से 1994 के बीच आधिकारिक तौर पर ‘मृत’ रहे थे। जब उन्होंने बैंक से ऋण के लिए आवेदन किया था, तब उन्हें पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। उनके चाचा ने उन्हें मृत दर्ज करने के लिए एक अधिकारी को रिश्वत दी थी और उनकी पैतृक भूमि का मालिकाना हक अपने नाम पर स्थानांतरित करवा लिया था। लाल बिहारी मृतक ने खुद को जीवित साबित करने के लिए 19 साल तक ब्यूरोक्रेसी से लड़ाई लड़ी। इस बीच उन्होंने अपने नाम के साथ ‘मृतक’ भी जोड़ लिया था।
अपने संघर्ष के दौरान लाल बिहारी ने अभिलेखों में हेराफेरी को उजागर करने और अपनी दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए कई अतरंगी तरीके आजमाए। उन्होंने अपना अंतिम संस्कार खुद आयोजित किया और यहां तक कि अपनी पत्नी के लिए विधवा पेंशन के लिए भी आवेदन कर दिया। वह यह साबित करने के लिए चुनाव लड़े कि वह जीवित हैं। साल 1994 में लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार बिहारी अपनी ‘मृत’ स्थिति को रद्द कराने में कामयाब रहे। इसके बाद लाल बिहारी ने सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से संपत्ति हड़पने के लिए सरकारी रेकॉर्ड में मृत घोषित किए गए लोगों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए ‘मृतक संघ’ की स्थापना की है।
उनके संघर्ष पर एक बायोपिक ‘कागज़’ 2021 में सतीश कौशिक के निर्देशन में बनी थी, जिसमें अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने उनका किरदार निभाया था। भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों पर आधारित इस फिल्म में मोनाल गज्जर, मीता वशिष्ठ, अमर उपाध्याय और सतीश कौशिक भी थे। मार्च में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आधिकारिक तौर पर ‘मृत’ होने पर खोए वर्षों के लिए सरकार से 25 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था। पीठ ने अदालत का समय बर्बाद करने के लिए उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

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