शरीर पूरी तरह सफेद, स्किन फटी हुई, बरेली के अस्‍पताल में जन्‍मा हार्लेक्विन बेबी

बरेली,(उत्तर प्रदेश)। बरेली के बहेड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दुर्लभ आनुवांशिक विकार (हार्लेक्विन इक्थियोसिस) से पीड़ित एक और बच्चे का जन्म हुआ। नार्मल डिलिवरी से जन्मा बच्चा पांच दिन बाद भी जिंदा है। डॉक्टरों ने बीमारी की वजह पता करने के लिए स्किन बायोप्सी और केरिया टाइमिन जांच के लिए सैंपल लिया है। इससे पहले 15 जून को शहर के एक अस्पताल में इसी तरह का मृत बच्चा जन्मा था। डॉक्‍टरों का कहना है कि ऐसे जन्‍मे बच्‍चों को हार्लेक्विन इक्थियोसिस बेबी कहा जाता है। बच्‍चे का शरीर पूरी तरह से सफेद है। त्‍वचा जगह जगह से फटी हुई है।
बुधवार को जन्‍म के बाद से बच्‍चा अजीब तरह की आवाज निकाला रहा है। बच्‍चे के घरवाले बुरी तरह डर गए। जब डॉक्‍टरों ने उन्‍हें दुर्लभ बीमारी के बारे में बताया तब शांत हुए। फिलहाल बच्‍चे को लेकर घरवाले चले गए हैं। पूरे इलाके में इस बच्‍चे के बारे में लोग चर्चा कर रहे हैं। डॉक्‍टर का कहना है कि इस बीमारी में बच्‍चे के शरीर में तेल बनाने वाली ग्रंथियां न होने से त्‍वचा फटने लगती है। आंखों की पलके पलटने की वजह से चेहरा कुरूप लगने लगता है। पूरी दुनिया में अब तक इस बीमारी के ढाई सौ मामले सामने आए हैं। ज्‍यादातर मामलों में जन्‍म के कुछ घंटे बाद ही बच्‍चे की मौत हो जाती है। बच्‍चे के ज्‍यादा दिन जीने की संभावना नहीं रहती है क्‍योंकि इसका कोई इलाज नहीं है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल अग्रवाल ने बताया कि हार्लेक्विन बेबी की मौत जन्‍म के दौरान या कुछ घंटे बाद ही हो जाती है। दरअसल ये बच्‍चे प्रीमेच्‍योर होते हैं। यह विकार माता-पिता से बच्‍चे को ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न से मिलता है, जो जीन के उत्‍परिवर्तन से होता है। शरीर में प्रोटीन और म्‍यूकस मेंब्रेन की गैर मौजूदगी की वजह से बच्‍चे की हालत ऐसी हो जाती है।

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