उत्तराखंड में महिला कर्मचारी का कॉल रिकॉर्ड निकलवाने पर जज सस्पेंड

देहरादून,(एजेंसी)। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चमोली के जिला न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी को उनकी अदालत में बयान दर्ज कराए जाने के दौरान अनुपस्थित रहने तथा एक महिला अधीनस्थ कर्मचारी की निजता के अधिकार का उल्लंघन करने के आरोप में निलंबित करने के आदेश दिए हैं। सोमवार को जारी हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप चतुर्वेदी को चंपावत में जिला और सत्र न्यायाधीश के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। आदेश की प्रति बुधवार को प्राप्त हो सकी।
यह भी पाया गया कि न्यायाधीश ने अपनी एक अधीनस्थ महिला कर्मचारी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड हासिल करके उसकी निजता का उल्लंघन करने के लिए अपने अधिकार का दुरुपयोग किया। बुधवार को उपलब्ध हुए हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अपनी निलंबन अवधि के दौरान चतुर्वेदी चंपावत में जिला एवं सत्र न्यायालय के कार्यालय से संबंद्ध रहेंगे । अभी इस बात की जानकारी नहीं मिल पायी है कि चतुर्वेदी की जगह चमोली के जिला न्यायाधीश के पद पर किसे नियुक्त किया गया है ।
रजिस्ट्रार-जनरल अनुज कुमार संगल द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि न्यायाधीश ने अपने अधीनस्थों और अपनी अदालत में पेश होने वाले अधिवक्ताओं से अपने फायदे के लिए बयान प्राप्त करने के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया था। एक महिला कर्मचारी के कॉल-डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी प्राप्त किए थे, जो उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है और किसी भी व्यक्ति के कॉल रिकॉर्ड को तलब करने से संबंधित कानून का उल्लंघन है।
न्यायाधीश को इस साल 11 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जब यह पाया गया था कि उनकी अदालत में एविडेंस की रिकॉर्डिंग हो रही थी, जब वह शारीरिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। अपने जवाब में चतुर्वेदी ने कहा कि वह गुर्दे की पथरी से पीड़ित हैं और अक्सर शौचालय जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपनी कुर्सी छोड़ते थे, सबूतों की रिकॉर्डिंग बंद करने का निर्देश देते थे। हालांकि, HC द्वारा एक्सेस की गई वीडियो क्लिप से पता चला कि जब जज मौजूद नहीं थे तब भी सबूत रिकॉर्ड किए जा रहे थे। उच्च न्यायालय को उनका जवाब संतोषजनक नहीं लगा।

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