श्रद्धा हत्याकांड का हवाला देते हुए विश्व हिंदू परिषद ने राष्ट्रव्यापी ‘लव जिहाद विरोधी’ कानून की मांग की

नयी दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद ने भारत में “लव जिहाद को रोकने” के लिए एक केंद्रीय कानून की मांग की है। संगठन ने श्रद्धा वालकर  की हत्या के मामले का हवाला दिया, जिसे उसके लिव-इन पार्टनर आफताब पूनावाला ने मार डाला और उसके शव के 35 टुकड़े कर दिए। विश्व हिंदू परिषद ने श्रद्धा वालकर हत्याकंड पर कहा कि यह हत्या “स्पष्ट कट लव जिहाद का मामला” था। वीएचपी ने दावा किया कि उसने अकेले नई दिल्ली में पिछले 10 वर्षों में लगभग 420 “लव जिहाद” मामलों की एक सूची तैयार की है। संगठन ने श्रद्धा वाकर हत्याकांड को लव जिहाद से जोड़ा।

वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा, ‘आफताब की 20 गर्लफ्रेंड थीं और वे सभी हिंदू थीं। इसका मतलब है कि यह सुनियोजित था। दक्षिणपंथी संगठन ने 21 दिसंबर से 31 दिसंबर तक ‘धर्म रक्षा’ अभियान शुरू करने का भी फैसला किया है। विहिप की महिला शाखा, दुर्गा वाहिनी, लड़कियों को लव जिहाद के बारे में “जागरूक” करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी।

आपको आफताब के केस के बारे में अपडेट करे तो अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वालकर की हत्या के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की यहां रोहिणी के एक अस्पताल में करीब दो घंटे तक नार्को जांच हुई। अधिकारियों ने बताया कि पूनावाला की नार्को जांच पूरी तरह सफल रही और उसका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक है। विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) सागर प्रीत हुड्डा ने कहा कि नार्को जांच की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। अधिकारियों ने बताया कि पूनावाला को सुबह आठ बजकर 40 मिनट पर रोहिणी के डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर हॉस्पिटल लाया गया और नार्को जांच सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई। जांच के बाद उसे चिकित्सीय निगरानी में रखा गया। पूनावाला को शुक्रवार को यहां फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ले जाए जाने की संभावना है।

एफएसएल के सूत्रों के मुताबिक, उसके पॉलीग्राफी तथा नार्कों जांच के दौरान दिए गए जवाबों का विश्लेषण किया जाएगा और पूनावाला को उसके द्वारा दिए गए जवाबों के बारे में बताया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नार्को जांच से पहले पूनावाला की रक्तचाप, नाड़ी की गति, शरीर का तापमान और दिल की धड़कन की जांच समेत अन्य सामान्य जांच की गयी। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के तहत, पूनावाला और उसकी जांच कर रही नार्को टीम की पूरी जानकारी के साथ एक सहमति फॉर्म उसके समक्ष पढ़ा गया।

फॉर्म पर उसके हस्ताक्षर करने के बाद नार्को जांच की गयी। नार्को जांच में सोडियम पेंटोथल, स्कोपोलामाइन और सोडियम एमिटल जैसी दवा दी जाती है जो व्यक्ति को एनेस्थीसिया के विभिन्न चरणों तक लेकर जाती है। सम्मोहन (हिप्नोटिक) चरण में व्यक्ति पूरी तरह होश हवास में नहीं रहता और उसके ऐसी जानकारियां उगलने की अधिक संभावना रहती है जो वह आमतौर पर होश में रहते हुए नहीं बताता है। जांच एजेंसियां इस जांच का इस्तेमाल तब करती हैं जब अन्य सबूतों से मामले की साफ तस्वीर नहीं मिल पाती है। दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसने पूनावाला की नार्को जांच की मांग की है क्योंकि पूछताछ के दौरान उसके जवाब ‘‘भ्रामक’’ रहे।

उच्चतम न्यायालय का आदेश है कि नार्को जांच, ब्रेन मैपिंग और पॉलिग्राफी जांच संबंधित व्यक्ति से मंजूरी लिए बिना नहीं की जा सकती हैं। साथ ही इस जांच के दौरान दिए गए बयान अदालत में प्रारंभिक सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं हैं। केवल कुछ परिस्थितियों में ही ये स्वीकार्य हैं जब पीठ को मामले के तथ्य और प्रकृति इसके अनुरूप लगे। पूनावाला (28) पर अपनी ‘लिव-इन पार्टनर’ श्रद्धा वालकर की हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े करने का आरोप है। आरोप है कि उसने शव के टुकड़ों को दक्षिण दिल्ली में महरौली के अपने घर में करीब तीन सप्ताह तक 300 लीटर के एक फ्रिज में रखा और फिर कई रातों तक उसे शहर के विभिन्न स्थानों पर जाकर फेंकता रहा। उसे 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था।

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