भारत की भैंस पर नेपाल की संसद में क्यों मचा हंगामा? विपक्ष के निशाने पर आ गए प्रचंड

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। भारत के दौरे से लौटे नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंज लगातार अपने देश में आलोचकों के निशाने पर हैं। कभी भारत के हाथों नेपाल को बेचने के विपक्ष की ओर से उनपर आरोप लगाए गए। वहीं अब प्रचंड अपने एक समझौते की वजह से विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। नेपाल और भारत ने एक समझौता किया है जिसके तहत नई दिल्ली काठमांडू को 15 मुर्रा नस्ल के भैंस देगा। भारत और नेपाल के बीच मुर्रा भैंस की डील पर नेपाली संसद में जमकर हंगामा हुआ है। विपक्ष ने तो ये भी कह दिया कि प्रचंड भारत से भैंस पर बैठकर वापस आए हैं।
भारत सरकार की ओर से नेपाल सरकार को दिए जाने वाले 15 मुर्राह भैंसों का उपयोग कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से 100,000 से अधिक भैंसों में क्रॉसब्रीडिंग और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाएगा। कृषि और पशुधन विकास मंत्रालय ने कहा कि तीन साल बाद एक साल में 15 मुर्रा भैंस बैलों से 150,000 वीर्य के उत्पादन के बाद कम से कम 100,000 भैंसों पर कृत्रिम गर्भाधान से क्रॉसब्रीडिंग के माध्यम से दूध उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि होगी। उन्‍होंने कहा कि हम चाहते थे कि हमारे प्रधानमंत्री हाल ही में उद्घाटन हुए पोखरा एयरपोर्ट पर उतरेंगे लेकिन दुर्भाग्‍य से वह भैंस पर बैठकर वापस लौटे हैं।
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की हाल की भारत यात्रा के दौरान, नेपाल को मुर्रा भैंस बैल प्रदान करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2018 में हुई नेपाल-भारत संयुक्त कृषि समूह की बैठक के आधार पर अलग-अलग तारीखों में भारत के साथ नेपाल सरकार से मुर्राह भैंस बैल मांगे गए थे। बताया जाता है कि इसके तकनीकी पहलुओं के अवलोकन के लिए नेपाली विशेषज्ञों और तकनीशियनों के भारतीय खेतों में जाने की तैयारी चल रही है।
तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने के बाद, मुर्राह भैंस बैल भारतीय पक्ष से नेपाल के सीमा शुल्क बिंदुओं में नेपाली पक्ष को उपलब्ध कराए जाएंगे। मुर्रा भैंस बैलों का प्रबंधन पोखरा, नेपालगंज और लाहन स्थित राष्ट्रीय पशुधन प्रजनन कार्यालय, पशुधन सेवा विभाग के कार्यालयों में किया जाएगा।

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