लालकिले पर हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकी आरिफ को होगी फांसी!, तिहाड़ जेल ने निचली अदालत को लिखा पत्र

नई दिल्ली। तिहाड़ जेल में बंद लाल किले पर हुए आतंकी हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक को फांसी पर लटकाने के लिए तिहाड़ जेल ने निचली अदालत को पत्र लिखा है, ताकि इसकी फांसी की सजा का दिन मुकर्रर करते हुए इसका डेथ वॉरंट जारी कराया जा सके। फिलहाल किसी भी अदालत में फांसी से संबंधित इसकी कोई भी याचिका विचाराधीन नहीं है। बता दें कि 22 दिसंबर 2000 के दिन लाल किले में लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए आतंकी हमला किया था। हमले में दो जवान शहीद हो गए थे। एक अन्य नागरिक भी मारा गया था। बाद में इस मामले में फरार हुए पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत से इसे अक्टूबर 2005 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। जो बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी बरकरार रखी गई थी। इस मामले में अभी तक इसकी किसी ना किसी अदालत में याचिका विचाराधीन चल रही थी, लेकिन अब निचली अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका विचाराधीन नहीं है।
इस बात को देखते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसे पिछले दिनों नोटिस देकर 7 दिनों में जवाब देने के लिए कहा था कि वह 7 दिनों में बता दे कि उसे अपनी फांसी की सजा के खिलाफ किसी अदालत में या फिर राष्ट्रपति के यहां दया याचिका डालनी है। सात दिनों तक इसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद इसे बता दिया गया कि अगर यह सात दिनों तक इस बारे में कोई जवाब नहीं देगा, तो फिर इसके खिलाफ निचली अदालत से फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वॉरंट जारी कराने की अपील की जाएगी।
इसके 7 दिन पूरे होने के भी कुछ दिन बाद तिहाड़ जेल की ओर से निचली अदालत को पत्र लिखा गया है। जिसमें कोर्ट से इसकी फांसी का दिन तय करते हुए इसके खिलाफ डेथ वॉरंट जारी करने की रिक्वेस्ट की गई है। बताया जाता है कि इसके लिए कोर्ट ने आने वाली 27 फरवरी का दिन तय किया है। जिस दिन इसके खिलाफ ब्लैक वारंट जारी होने या इससे संबंधित फैसला सुनाया जाएगा।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अभी आरिफ के पास फांसी की सजा के खिलाफ कई कानूनी विकल्प हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट में अभी वह जा ही सकता है। साथ ही अभी इसने राष्ट्रपति के पास भी अपनी दया याचिका दायर नहीं की है। ऐसे में कानूनी जानकारों का कहना है कि इसकी फांसी की सजा टलना तो शायद संभव नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि यह कुछ कानूनी दांव-पेंच अपनाकर अपनी फांसी की सजा को कुछ दिनों के लिए टाल जरूर सकता है। तिहाड़ जेल में इससे पहले संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल को 9 फरवरी 2013 के दिन तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया था। इसके बाद निर्भया गैंग रेप के 4 दोषियों को एक साथ 20 मार्च 2020 को फांसी पर लटकाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए लाल किला हमले के दोषी आतंकी मोहम्मद आरिफ को तिहाड़ की जेल नंबर-3 में एकदम अलग सेल में रखा गया है। इसके उपर निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

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