सूरत के 70 वर्षीय व्यवसायी ने कारों का बेड़ा छोड़ा, 3 दशक पुरानी साइकिल पर रोजाना करते हैं 40 किमी सफर
70-year-old Surat businessman gives up his fleet of cars, travels 40 km daily on a 3-decade-old bicycle

सूरत/गुजरात। सूरत के 70 वर्षीय सुरेश जरीवाला एक टेक्सटाइल टाइकून, फिटनेस के दीवाने और साइकिलिंग के दिग्गज हैं। आज भी वे 30 साल पुरानी एटलस साइकिल चलाते हैं। रोज सुबह 5:45 बजे उठकर वो 30-40 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। वो यह सब दिखावे या खेल के लिए नहीं, बल्कि अपने मन की शांति के लिए करते हैं। 1972 से वो ऐसा कर रहे हैं। जरीवाला के पास कई शानदार कारें और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन हैं, लेकिन वो साइकिल चलाना पसंद करते हैं। क्योंकि यह उनके जीवन का एक हिस्सा है। उनके दोस्त नवीन पटेल कहते हैं कि जरीवाला की साइकिल भारी धातु की है, लेकिन उनकी आत्मा हवा से भी हल्की है।
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश जरीवाला 1972 से साइकिल चला रहे हैं। जब उनकी फैक्ट्री सूरत में थी, तब वो रोज साइकिल से काम पर जाते थे। 1982 में फैक्ट्री के अंकलेश्वर में शिफ्ट होने के बाद भी उन्होंने साइकिल चलाना नहीं छोड़ा। उनका घर सूरत के सलाबतपुरा में था। वो 3 किलोमीटर साइकिल चलाकर सूरत स्टेशन जाते थे। फिर ट्रेन से अंकलेश्वर जाते थे। वहां स्टेशन पर उनकी एक और साइकिल खड़ी रहती थी, जिससे वो 4 किलोमीटर दूर फैक्ट्री जाते थे। वो हर रोज ऐसा करते थे।
1990 के दशक में उन्होंने एटलस साइकिल खरीदी। इसकी कीमत 2,000 रुपये थी। यह एक साधारण, भारी और टिकाऊ मॉडल था। वो आज भी उसी साइकिल को चलाते हैं। 30 साल बाद भी साइकिल का फ्रेम मजबूत है, पहिए स्थिर हैं और राइडर यानी जरीवाला अटूट हैं।
उनके घर में 22 लोगों का संयुक्त परिवार है। जरीवाला चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके सबसे बड़े भाई 80 साल के हैं। सबसे छोटा पोता-पोती तीन साल का है। सभी उनके अनुशासन की प्रशंसा करते हैं। कुछ लोग इसका पालन करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ही सफल हो पाते हैं। जरीवाला 10,000 कदम भी चलते हैं। वो दौड़ में भाग लेते हैं और मैराथन में दौड़ते हैं। साल में एक बार वो 300 किलोमीटर साइकिल चलाकर महाराष्ट्र के शिरडी जाते हैं।
क्या कहते हैं दोस्त?उनके दोस्त टेक्सटाइल व्यवसायी नवीन पटेल कहते हैं कि आजकल की बाइक कार्बन फाइबर की होती हैं, जो बहुत हल्की होती हैं। उनकी साइकिल भारी धातु की है। लेकिन उनकी आत्मा? हवा से भी हल्की है। जरीवाला में न तो जंग है और न ही वो रिटायर होने वाले हैं। बस सड़क पर रबर और उनकी आत्मा में लोहा है।




