कमीशन नहीं दिया तो मेरठ नगर निगम ने रोका 7 करोड़ का पेमेंट, ठेकेदार ने फांसी लगा दे दी जान

मेरठ,(उत्तर प्रदेश)। मेरठ में ठेकेदार दिवेश अग्रवाल ने नगर निगम पर सात करोड़ रुपया बकाया न मिलने के कारण आत्महत्या कर ली। ठेकेदार की ओर से उठाए गए इस कदम से नगर निगम में हड़कंप मच गया। अन्य ठेकेदारों का आरोप है कि बैगर कमीशन लिए कोई भी पेमेंट ठेकेदारों को नहीं मिलता है। जब पेमेंट के सिलसिले में नगर मेयर से मिलने जाओ तो वो अपने ऑफिस में बैठते नहीं हैं। अब नगर निगम का परिजनों पर कोई भी कानूनी कार्रवाई न करने का दवाब बनाते नजर आ रहे हैं।

मेरठ नगर निगम के ठेकेदार दिवेश अग्रवाल गंगानगर में मकान संख्या GP 90 में किराये पर रहते थे। ठेकेदार दिवेश जिला बुलंदशहर के अनूपशहर के मूल रूप से रहने वाले थे। देवेश अग्रवाल मेरठ नगर निगम में ठेकेदारी करते थे और उन्होंने नगर निगम में सात करोड़ के कई कार्य किए, लेकिन महीनों से इन कार्यों का भुगतान उन्हें नहीं मिला। इधर, कंस्ट्रक्शन मैटिरियल और अन्य लोगों का भुगतान के लिए ठेकेदार पर बराबर दबाव था। जिसके चलते ठेकेदार ने गंगानगर स्थिति किराये के मकान में पंखे से लटक कर अपनी जान दे दी।सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों के मुताबिक, दिवेश ने नगर निगम में लगभग 10 करोड़ से अधिक के विकास कार्य किए हैं। इनमें लोहिया पार्क, लियाना में नाला निर्माण समेत दर्जन भर से अधिक विकास शामिल हैं। वह मॉडर्न इंजीनियरिंग कंपनी के नाम से निर्माण कार्य करते थे।

पार्षदों ने बताया कि दिवेश गाजियाबाद निवासी नवीन गर्ग जो रिश्ते में उनके जीजा लगते थे, उनके नाम से मैसर्स मॉर्डन इंजीनियर के नाम से नगर निगम में फार्म रजिस्टर्ड थी। इस फर्म के जरिए उन्होंने करोड़ों के काम किए थे ।पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम मेरठ में भ्रष्टाचार चरम पर है। बगैर कमीशन कोई भी कार्य नहीं होता है। नगर निगम में मलाईदार पदों पर 10 या 12 से कर्मचारी एक ही सीट पर कुंडली मारे बैठे हैं। यही कारण है कि अपनी कमीशन के कारण भुगतान को रोक रखते हैं और न मेयर सुनते हैं, न ही नगर आयुक्त, जिसके कारण अन्य कई ठेकेदारों का भुगतान भी रुका हुआ पड़ा है। नगर आयुक्त पद पर कोई भी आए शुरू में थोड़े तेवर के बाद प्राय: सभी अफसर इन कर्मचारियों के सामने नसमस्तक हो जाते हैं।नगर निगम मेरठ में अभी हाल ही में नवल सिंह रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम द्वारा गिरफ्तार किया था। इसके अलावा राजेंद्र शर्मा, मुकेश शर्मा, रईस अहमद आदि तमाम कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्तता के कारण कार्रवाई की जद में आ चुके हैं।

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