नेताजी सुभाष चंद्र बोस की परपोती राजेश्वरी चौधरी जी के नेतृत्व में आजाद हिंद सरकार की बैठक का हुआ आयोजन

विजय लक्ष्मी पांडे,(दिल्ली ब्यूरो)। 30 दिसंबर, 1943 ब्रिटिश शासन में भारतीय उपमहाद्वीप में स्वतंत्रता का पहला दिन था जब स्वतंत्र भारत सरकार के तत्कालीन प्रमुख, महामहिम नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर में स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया था, जो स्वतंत्र भारत सरकार के तहत पहला क्षेत्र था। 30 दिसंबर, 2022, शुक्रवार को इस यादगार दिन के उपलक्ष्य में, नेताजी के अनुयायी/प्रशंसक/शोधकर्ता/स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के वंशज आईटीओ स्थित मालवीय स्मृति भवन में आजाद हिंद सरकार समिति को लॉन्च करने के लिए एक साथ आए, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों और प्रथम स्वतंत्र भारत सरकार की अधूरी दृष्टि और मिशन को राहत देना और पूरा करना है।

इस अवसर पर सुभाष चंद्र बोस की परपोती राजेश्वरी चौधरी जी के नेतृत्व में आजाद हिंद सरकार तथा हिंदू महासभा के मुख्य कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता और संचालन खुद राजेश्वरी चौधरी ने किया। इस बैठक में बलूचिस्तान के राजदूत बर्बाक बलूच भी उपस्थित हुए। जिन्होंने यह दावा किया कि वे क्रांतिकारी हैं और भारतीय बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं ,जिस पर पाकिस्तान कब्जा बनाए हुए हैं उन्होंने भरे सभा में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।

इस बैठक में कई ऐसे गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे, जिन्होंने यह दावा किया कि 1999 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सानिध्य में रहे और विमान दुर्घटना में हुई मौत की घटना को उनके द्वारा सरासर गलत बताया गया। कई सारे तथ्य कई सारी कहानियां कई सारे प्रमाण उन्होंने मंच के माध्यम से दिए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के द्वारा दिया हुआ वह पत्र जिसमें यह जिक्र था कि जिस दिन मैं मर जाऊंगा उस दिन मेरी अस्थियां सरकार को मिलेगी वह पत्र झूठा नेता जी के द्वारा सरकार को भरवाने के लिए भेजा गया था। उसके बाद भी वे पूरे देश में भ्रमण करते रहें और भारत सरकार ने उन्हें अपने ही देश में आने के लिए कभी भी पहल नहीं की।
आजादी के अमृत महोत्सव मना रही मौजूदा सरकार ने किसी भी स्वतंत्रता सेनानी या शहीद के घरों के व्यक्तियों को सदस्य नहीं बनाया। उसमें  बॉलीवुड और खिलाड़ी तथा अन्य बड़ी हस्तियों को सदस्य बनाया जिससे वह काफी नाराज हैं उनके अनुसार भारत आज भी गुलाम है।इस अवसर पर हिंदू महा सभा के राष्ट्रीय सचिव ने उस समय के संसद भवन का मॉडल बनाकर प्रस्तुत किया और उनका दावा है कि अगले 30 दिसंबर 2023 तक इसी संसद भवन में अखंड भारत का निर्माण होगा और राजनीतिक दल बनकर भारत पर राज्य करेगी। यह अखंड भारत का ही संसद भवन है जिसे अब तक के सभी सरकारों ने इनकार किया है। इस मॉडल के भवन में ही इस धरोहर को वह अध्यक्ष के रूप में संभाल रहे हैं उस संसद भवन का मॉडल भी इस बैठक कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया।

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