मुचलका पाबंद, शांति भंग, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की 200 फाइलें लौटाएगा गाजियाबाद जिला प्रशासन

गाजियाबाद ब्यूरो। कमिश्नरेट बनने के बाद अब जिला प्रशासन के अधिकारियों ने गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की फाइलों का निस्तारण करने पर रोक लगा दी है। पुलिस की ओर से भेजी गई 200 पत्रावलियों को अब प्रशासन के अधिकारी पुलिस को लौटाएंगे। इसके लिए सूची बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा मुचलका पाबंद, शांति भंग और जिला बदर की करीब 350 फाइलें भी पुलिस कमिश्नरेट भेजी जाएंगी।
गाजियाबाद को कमिश्नरेट बनाए जाने की घोषणा से पहले पुलिस अधिकारी अपराधी पर गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने फाइल तैयार कर जिला मजिस्ट्रेट को भेजे थे। जिला मजिस्ट्रेट इन फाइलों पर निर्णय लेकर कार्रवाई करते थे। अपर जिला मजिस्ट्रेट को भी इन फाइलों पर कार्रवाई करने का अधिकार है। कमिश्नर प्रणाली लागू हो जाने के बाद यह अधिकार पुलिस आयुक्त और उनके अधीनस्थ अन्य पुलिस अधिकारियों को भी मिल गया है। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद अभी तक पुलिस अधिकारियों की कोर्ट शुरू नहीं हुई है। इसकी वजह से जिला प्रशासन के अधिकारी इन फाइलों पर निर्णय ले रहे थे, ताकि प्रक्रिया बाधित न हो। अब एक सप्ताह में एसीपी की कोर्ट शुरू होने की संभावना है, ऐसे में डीएम और एडीएम ने इन पत्रावलियों पर कार्रवाई रोक दी है। इन फाइलों को जल्द ही पुलिस अधिकारियों को लौटा दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस कमिश्नर इनका निस्तारण कराएंगे।
डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि गुंडा एक्ट, जिला बदर, गैंगस्टर एक्ट की फाइलें एक सप्ताह से जिला प्रशासन में आना बंद हो गई हैं। अब इन फाइलों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। पूर्व में आ चुकी जिन फाइलों पर अभी निर्णय लेकर निस्तारण नहीं किया गया है, उन्हें भी वापस भेजा जाएगा।
एसीपी स्तर के अधिकारी एसडीएम या सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चलने वाली कार्यवाही की जानकारी ले रहे हैं। आईपीसी की धारा-151 के तहत पुलिस की ओर से कार्रवाई कर संबंधित लोगों को सिटी मजिस्ट्रेट या एसडीएम की कोर्ट में पेश किया जाता है। वह उन पर निर्णय लेकर या तो जमानत देते हैं या जेल भेजने का आदेश देते हैं।
जिले में अभी नौ एसीपी की कोर्ट में से चार कोर्ट बनकर तैयार हो गई हैं। इनमें जल्द ही सुनवाई शुरू होगी जबकि 28 दिसंबर से सभी नौ कोर्ट शुरू करने की तैयारी है। एसीपी कोर्ट में दूसरे जोन के एसीपी मामलों की सुनवाई करेंगे। इसके लिए रोस्टर तैयार किया जाएगा। फिलहाल डीसीपी के क्षेत्र में आने वाले मामलों सुनवाई भी अभी इन्हीं कोर्ट होगी। बाद में डीसीपी के लिए अलग कोर्ट बनाई जाएंगी।




