फतेहपुर में खून की जांच के नाम पर जान से खिलवाड़, मरीजों से हो रही लूट
In Fatehpur, life is being played with in the name of blood test, patients are being looted

सत्येंद्र शुक्ला,(फतेहपुर/उत्तर प्रदेश)। आपको ब्लड टेस्ट कराना है तो सचेत रहें, क्योंकि फतेहपुर जिले में खून की फर्जी जांच हो रही है और आपको इसकी जानकारी भी नहीं है। सरकार द्वारा मरीजों के लिए कई लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके सहारे निजी स्वास्थ्य सेवाएं देने वालों की चांदी काट रहे हैं। पैथोलॉजी हो या प्राइवेट अस्पताल हर जगह आने वाले मरीजों के साथ लूट का खेल चल रहा है। खासकर पैथोलाजियों में जांच के नाम पर जमकर मरीजों को लूटने का खेल चल रहा है। ज्यादातर पैथोलॉजी झोलाछाप चला रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमे की आंखे बंद हैं। कभी-कभी दिखावे के लिए छापेमारी जरूर होती है जो खानापूरी में ही निपट जाती है।
फतेहपुर में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी लैब और एक्सरे सेंटर का गोरखधंधा चल रहा है। इनका स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण भी नहीं है। हैरान करने वाली बात यह है कि शहर में दर्जनों लैब के पास लाइसेंस नहीं है। फतेहपुर जिले में फर्जी लैब की बाढ़ आ गई है।
नगर पंचायत खखरेरू के अंतर्गत कई पैथोलॉजी सेंटर अवैध रूप से चल रहे हैं जिन्हें जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने संरक्षण दे रखा है। इन पैथोलॉजी सेंटरों में मरीजों से जांच के नाम पर लूट की जा रही है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर भी मरीजों को अपंजीकृत लैब में खून की जांच कराने की सलाह देते हैं। इन लैब में खून की जांच करने वाले न तो उपकरण हैं न योग्य लोग। सूत्रों के अनुसार इन लैब में रक्तजांच के लिए पैथोलोजिस्ट नहीं है। कई लैब के संचालक टैक्नीशियन हैं, इन्हीं के सहारे लैब संचालित हो रही हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
मानक के मुताबिक हर पैथोलॉजी में एक पैथोलॉजिस्ट जरूर होना चाहिए। इसके अलावा जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित लोगों से काम करवाना चाहिए। मेडिकल कचरे के निस्तारण का भी कोई सहीं जगह पर हो। मरीजों से लूट पर लगाम लगाने के लिए हर जांच के रेट एक बोर्ड पर दर्ज होना चाहिए, लेकिन जिले के ज्यादातर पैथोलॉजी सेंटर कुछ मानकों पर ही अमल कर रहे है। न इन सेंटरों पर हर वक्त पैथॉलोजिस्ट मौजूद रहते हैं। न यह मेडिकल कचरे का सही तरीके से निस्तारण करते हैं। डाक्टर को मोटा कमीशन देने के फेर में यह सेंटर जांच करवाने के लिए आये मरीज की जेब पर जमकर डाका डालते हैं। इन सेंटरों पर सम्बंधित जांच की कोई रेट लिस्ट भी नहीं लगी है। वह मन मुताबिक मरीजों से जांच के नाम पर रुपये वसूलते हैं।
खून की जांच के लिए सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण होना आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग पंजीकरण देने से पहले उपकरण, डॉक्टरों की योग्यता की जांच करता है। जांच के दौरान देखा जाता है कि लैब में पैथोलॉजिस्ट है अथवा नहीं। पंजीकरण के बाद ही लैब में रक्तजांच खून की जांच हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने पैथोलॉजी की मानीटरिंग के लिए एक टीम बनाई है। जो तय समय पर इन सेंटर की जांच करती है। मजेदार बात यह है कि जांच टीम को कभी किसी सेंटर की कमियों पर निगाह नहीं पड़ी। यह टीम पहले से हो हल्ला कर निकलती है और केवल पैथोलॉजिस्ट की उपस्थिति देखकर वापस आ जाती है। सब काम मिली भगत से चल रहा है। औचक छापेमारी कर सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है।
फतेहपुर सीएमओ डॉक्टर राजीव नयन गिरी से वार्ता करने पर उन्होंने जांच का आश्वासन देकर कहा कि टीम भेज कर तत्काल जांच करके कार्रवाई की जाएगी।




