पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस तृणमूल कांग्रेस में शामिल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले बड़ा उलटफेर हुआ है। रविवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने लगभग तीन साल पहले बीजेपी छोड़ दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विभाजनकारी राजनीति कर रही है और नफरत फैला रही है।
कोलकाता/एजेंसी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस रविवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने लगभग तीन साल पहले बीजेपी छोड़ दी थी। सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने के बाद चंद्र कुमार बोस ने बीजेपी खेमे के प्रति अपनी शिकायतें भी जाहिर कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विभाजनकारी राजनीति कर रही है और नफरत फैला रही है।
नेताजी के परिवार के सदस्य चंद्र कुमार बोस रविवार दोपहर को बंगाल के निवर्तमान मंत्री ब्रात्य बसु और बर्दवान से तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। सत्ताधारी खेमे में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों का पालन नहीं करती है। उस पार्टी में रहते हुए नेताजी के आदर्शों के अनुसार काम करना बिल्कुल भी संभव नहीं है।
चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया कि बीजेपी इस समय विभाजनकारी राजनीति कर रही है और नफरत फैला रही है। मैंने भारत को बचाने और इस विभाजन की राजनीति पर रोक लगाने के लिए तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया है। हमें इसके खिलाफ लड़ना होगा।
दरअसल चंद्र कुमार बोस 2016 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। उस साल के चुनावों में उन्होंने भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में चंद्र कुमार बोस ने कोलकाता दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि वे दोनों ही चुनावों में जीत हासिल नहीं कर पाए। इन घटनाओं के बाद बीजेपी नेतृत्व से उनकी दूरी बढ़ने लगी। आखिरकार 2023 में चंद्र बोस ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
एसआईआर में बोस को सुनवाई के लिए बुलाया
बीजेपी छोड़ने के तुरंत बाद ही चंद्र बोस के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें शुरू हो गईं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बारे में उनके द्वारा की गई कई तारीफ भरी टिप्पणियों के बाद इन अफवाहों को और भी ज्यादा जोर मिला। हाल ही में नेताजी के प्रपौत्र को एसआईआर द्वारा सुनवाई के लिए भी बुलाया गया था। इस घटना ने बाद में राज्य की राजनीति में एक विवाद खड़ा कर दिया।
बीजेपी में शामिल होना ऐतिहासिक भूल-बोस
इसके बाद 27 मार्च को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में चंद्र बोस ने लिखा कि बीजेपी में शामिल होने का उनका फैसला एक ऐतिहासिक भूल थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर किसी पार्टी का एकमात्र मकसद सिर्फ चुनाव जीतने के लिए मतदाताओं के बीच फूट डालना है, तो मेरे लिए इसे स्वीकार करना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है। इसके ठीक 15 दिन बाद चंद्र बोस रविवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।




