गया जी में प्रशासन की घोर लापरवाही का अजब नमूना : जिंदा वार्ड पार्षद को कर दिया गया मृत घोषित!

पटना/एजेंसी। गया जी में एक हैरानी में डालने वाली घटना सामने आई है। यहां वार्ड नंबर 34 की पार्षद शीला देवी को प्रशासनिक लापरवाही के चलते मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वे जीवित हैं। वे अब इस गलती को सुधारने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं। शीला देवी को अपने मृत घोषित कर दिए जाने का पता तब चला जब उनकी विधवा पेंशन आनी बंद हो गई। वे जब केवाईसी कराने के लिए वसुधा केंद्र पहुंचीं, तो उन्हें पता चला कि वे अब सरकारी रिकॉर्ड में जीवित नहीं हैं, उन्हें मृत मान लिया गया है।
अब वे हाथों में तख्ती लेकर बता रही हैं कि वे जीवित हैं। शीला देवी ने तख्ती पर लिख रखा है- ”मैं शीला देवी पति स्वर्गीय फुच्चू यादव, वर्तमान वार्ड पार्षद, वार्ड नंबर 34 की पार्षद, अभी मैं जीवित हूं।”गयाजी के गेवाल बिगहा में रहने वालीं शीला देवी इस घटना से बहुत दुखी हैं। वे खुद अपने वार्ड के लोगों के जन्म और मृत्यु का सत्यापन करते हुए अपने हस्ताक्षर से सर्टिफिकेट बनाती हैं, लेकिन आज उन्हें खुद को जीवित साबित करने के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है।
शीला देवी के पति की मृत्यु के बाद से उन्हें करीब 18 साल से विधवा पेंशन मिल रही थी। नवंबर 2025 तक उनके खाते में पेंशन की राशि आई। जब राशि आनी बंद हो गई तो उन्होंने केवाईसी के लिए वसुधा केंद्र में संपर्क किया। इस केंद्र में मिली जानकारी ने उन्हें चौंका दिया। उनका कहना है कि ऐसे लोगों पर जो बैठकर सत्यापन करते हैं और जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देते हैं, सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। शीला देवी ने मांग की है कि इस गलती को जल्द से जल्द सुधारा जाए और उनकी विधवा पेंशन फिर से शुरू की जाए। शीला देवी का कहना है कि वे हर दिन अपने वार्ड के काम करती हैं। नगर निगम के सरकारी कामकाज के लिए अपने दस्तखत भी रोज करती हैं। लेकिन प्रखंड कार्यालय में बरती जा रही लापरवाही का नतीजा है कि उनको मृत घोषित कर दिया गया है।
शीला देवी के पुत्र ओम यादव के अनुसार, जब वे विधवा पेंशन के लिए अपनी मां को साथ लेकर केवाईसी कराने के लिए पहुंचे तो वे वहां के कर्मचारियों की बातें सुनकर हैरत में पड़ गए। उन्हें वहां बताया गया कि विधवा पेंशन इसलिए बंद कर दी गई है क्योंकि जांच रिपोर्ट में लाभार्थी की मौत होने की बात लिखी गई है। जब शीला देवी खुद प्रखंड कार्यालय पहुंचीं और उन्होंने उन्हें मृत घोषित किए जाने के बारे में सवाल पूछे तो किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने उनको जवाब नहीं दिया।
हद तो तब हो गई जब ओम यादव को दफ्तर में बताया गया कि उनकी मां शीला देवी के बारे में तो तीन साल पहले ही जांच में पता चला था कि वे मर चुकी हैं। इससे एक और सवाल पैदा हुआ कि यदि ऐसा था तो उनके खाते में तीन साल से पेंशन की राशि कैसे आ रही थी? पेंशन तो दो माह पहले नंवबर में बंद हुई है। पार्षद शीला देवी ने जिला कलेक्टर (डीएम) को आवेदन देकर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। शीला देवी का कहना है कि वे आम घरेलू महिला नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि हैं। ऐसे में उनके बारे में जांच करने में गड़बड़ी कैसे हो सकती है। वे प्रतिदिन अपने वार्ड में काम करती हैं। उनके जीवित या मृत होने के बारे में जांच कैसे की गई? जांच नहीं, यह एक मजाक हो गया है।

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