तेल के खेल में महंगाई करेगी बेहाल, भारत पर कितना पड़ेगा असर

नई दिल्ली/एजेंसी। ईरान युद्ध देश की महंगाई दर को प्रभावित करने जा रहा है। सरकार यह दावा जरूर कर रही है कि उसके पास 25 करोड़ बैरल कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम का रिजर्व है और तमाम रिजर्व को मिलाकर अगले 7-8 सप्ताह के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन दूसरी तरफ पिछले नौ दिनों में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है और स्ट्रेट ऑफ हरमूज के रास्ते के बंद होने और खाड़ी देशों की तरफ से तेल का उत्पादन प्रभावित होने से कच्चे तेल के दाम अभी चढ़ते ही जाएंगे।
जानकार बता रहे हैं कि इस परिस्थिति में भारत का आयात बिल बढ़ता जाएगा और कच्चे तेल की कीमत की एक सीमा के बाद पेट्रोलियम कंपनियों के पास इसका भार उपभोक्ताओं पर डालने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। कच्चे तेल के दाम में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से सालाना आयात बिल में 13-14 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दिख सकती है। आरबीआई के मुताबिक अगर कच्चे तेल के बेसलाइन कीमत (70 डॉलर प्रति बैरल) में 10 प्रतिशत का इजाफा होता है और उसका भार घरेलू कीमतों पर डाल दिया जाए तो महंगाई दर में 30 आधार अंक की बढ़ोतरी हो सकती है।
खुदरा महंगाई दर की गणना में पिछले महीने से ईंधन के भार को बढ़ा दिया गया है। इससे भी महंगाई दर बढ़ेगी जो अर्थव्यवस्था की विकास दर पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। पिछले चार सालों में पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में अति मामूली इजाफा हुआ है।
जानकार बता रहे हैं कि भारत के पास कच्चे तेल का जो भी स्टाक हो, कच्चे तेल की खरीदरी तो लगातार जारी रहेगी। सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम कंपनियां 100 डॉलर प्रति बैरल की कीमत के बाद खुदरा कीमत में बदलाव के लिए मजबूर हो जाएंगी क्योंकि उन पर वित्तीय दबाव काफी अधिक बढ़ने लगा है।
खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी से बचने के लिए केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर वसूलने वाले एक्साइज ड्यूटी में कमी कर सकती है, लेकिन इससे सरकार का राजस्व प्रभावित होगा। दिल्ली में अभी भाड़ा मिलाकर पंप पर पेट्रोल का बेस प्राइस 55-58 रुपए प्रति लीटर होता है।
करीब 20 रुपए प्रति लीटर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लेती है। करीब चार रुपए प्रति लीटर डीलर का मार्जिन होता है और करीब 15.50 रुपए राज्य सरकार वैट लेती है। वैट अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत 27 देशों की जगह अब 40 देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, फिर भी चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जनवरी में 50 प्रतिशत आयात आर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्ट कंट्रीज (ओपेक) से किया गया।
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जनवरी में भारत ने 20.63 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया। इनमें 46.9 प्रतिशत हिस्सेदारी मध्य पूर्व के देशों की थी। युद्ध लंबा चला तो कच्चे तेल का आयात प्रभावित होना तय है। अर्थव्यवस्था में तेजी से भारत में पेट्रोल व डीजल की खपत भी लगातार बढ़ती जा रही है। पीपीएसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी में पेट्रोल की खपत पिछले साल फरवरी की तुलना में 5.74 प्रतिशत तो डीजल की खपत 4.44 प्रतिशत अधिक रही।

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