दिल्ली पुलिस के के डीसीपी, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश

सुबह बेची शाम को उठवा ली कार धोखाधड़ी मामले में फंसे आईपीएस समेत 3 पुलिसवाले, कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

नई दिल्ली। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के तत्कालीन डीसीपी, एक इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर को धोखाधड़ी के एक मामले में अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश से राहत नहीं मिली। मजिस्ट्रेट अदालत से 17 दिसंबर 2024 में जारी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ आईपीएस अधिकारी, इंस्पेक्टर और एसआई की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आदेश दिया कि मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद एसीपी की ओर से इसकी जांच कराई जाए।प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज (एनडब्ल्यू) विरेंद्र कुमार बंसल ने इंस्पेक्टर राजेश विजय (भरत नगर के तत्कालीन एसएचओ), एसआई शैलेंद्र और आईपीएस जितेंद्र मीणा (नॉर्थ वेस्ट के तत्कालीन डीसीपी) की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट ने अपने अधिकार क्षेत्र का सही इस्तेमाल किया। पारित आदेश में कोई अनियमितता या अवैधता नहीं है। मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता धर्मेश शर्मा की एडवोकेट संजय शर्मा के जरिए दायर आवेदन पर उक्त आदेश पारित किया था, जिसमें कपिल मेहता, प्रिंसी मेहता, केशव मेहता नाम के तीन व्यक्तियों के साथ तीन पुलिसवालों को भी आरोपी बनाया गया।
शर्मा के आरोपों के मुताबिक, मेहता परिवार ने कारों की खरीद फरोख्त के कारोबार से मोटे लाभ का लालच देकर उनसे अपने कारोबार में लाखों रुपये इन्वेस्ट कराए। सवा तीस लाख में एक इनोवा कार सुबह बेची और शाम को उसे उठवा लिया और फिर उसे केरल में किसी कार डीलर को दे दिया। आरोप के मुताबिक, अपने साथ हुई कथित ठगी की शिकायत उन्होंने पुलिस के आला अफसरों तक से की, पर किसी ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
मामले में दाखिल पुलिस की रिपोर्ट से अदालत ने पाया कि पहले तो जांच एजेंसी ने शिकायत नहीं मिलने का झूठा दावा किया। फिर बाद में माना कि कार शिकायतकर्ता के नाम पर दर्ज है और इस वक्त केरल में है, जिसे बरामद नहीं किया जा सका है। इन सब तथ्यों के मद्देनजर अदालत ने प्रस्तावित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि मामले में संज्ञेय अपराधों का खुलासा हो रहा है और कार को जब्त करना जरूरी है, जो पुलिस के बिना संभव नहीं है।

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