सिद्धबली मंदिर में दर्शन मात्र से पूरी होती है मनोकामना, गुरु गोरखनाथ से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

Wishes are fulfilled just by visiting Siddhabali temple, the history of the temple is connected to Guru Gorakhnath

हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। हनुमान जी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। मंगलवार का दिन हनुमान जी को अतिप्रिय है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जो भी जातक मंगलवार के दिन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में अगर आप भी अपनी कोई मनोकामना पूरी करना चाहते हैं, तो आपको उत्तराखंड के कोटद्वार में स्थित श्री सिद्धबली मंदिर में दर्शन के लिए जा सकते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, उत्तराखंड के कोटद्वार में स्थित श्री सिद्धबली मंदिर में दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। वहीं श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद लोग मंदिर में भंडारा करवाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।
पौराणिक कथा के मुताबिक गोरखनाथ को भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। उनको भक्ति आंदोलन का जनक भी माना जाता है। कहा जाता है कि गोरखनाथ को उत्तराखंड के कोटेद्वार में सिद्धि प्राप्त हुई थी। इसकी वजह से उनको सिद्धबाबा कहा जाता है। गोरख पुराण के अनुसार, गोरखनाथ के गुरु का नाम गुरु मछेंद्रनाथ था। बजरंगबली की आज्ञा से वह एक बार त्रिया राज्य की रानी मैनाकनी के साथ रहे थे।
जब इस बात की जानकारी गुरु गोरखनाथ को हुई, तो वह अपने गुरु मछेंद्र नाथ को रानी मैनाकनी से मुक्त कराने के लिए चल दिए। बताया जाता है कि सिद्धबली में भगवान हनुमान ने अपना रूप बदलकर गोरखनाथ का रास्ता रोक लिया। जिसके बाद दोनों में भयंकर युद्ध हुआ और दोनों ही एक-दूसरे को हरा नहीं पाए। तब हनुमान जी ने अपना असली रूप दिखाना और गुरु गोरखनाथ से प्रसन्न होकर उन्हें दो वरदान मांगने के लिए कहा। तब गुरु गोरखनाथ ने हनुमान जी से इसी स्थान पर रहकर उनके पहरेदार के रूप में रहने की प्रार्थना की।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस जगह पर सिखों के गुरु गुरु नानक देव और एक मुस्लिम फकीर ने भी पूजा-अर्चना की थी। इस तरह से इस मंदिर का नाम श्री सिद्धबली मंदिर पड़ गया। वर्तमान समय में यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामना पूरी होती है। वहीं भक्त मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में भंडारा करवाते हैं।

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