गोरखपुर में मकान तोड़ने का चहारदीवारी पर नोटिस, मचा हड़कंप

Notice for demolition of house on boundary wall in Gorakhpur, uproar ensues

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। गोरखपुर में नाला निर्माण की राह में आ रहे निर्माणों को तोड़ने के लिए अब अभियान शुरू होगा। नाला निर्माण रूट पर जमीन को खाली करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर रुख कड़ा किया गया है। दरअसल, गोड़धोइया नाले के निर्माण में बाधा बन रहे मकानों को तोड़ने के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। नाले की जद में आ रहे मकानों को खाली कराने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। दरअसल, नाला निर्माण की जद में 120 मकान आ रहे हैं। उन्हें स्थल खाली करने का निर्देश दिया गया है। अगर ऐसा नहीं होता है तो प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होगी।मकान मालिकों को पहले ही मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कुछ मकान अब तक नहीं तोड़े गए हैं। प्रशासन ने मकान की दीवारों पर नोटिस चस्पा कर एक सप्ताह के भीतर जगह खाली करने का निर्देश दिया है। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है। नोटिस के तहत दीवार पर लिखा गया है कि एक सप्ताह के अंदर नाला स्थल को खाली कर दें। दीवार पर संबंधित मकान में नाला निर्माण के लिए खाली की जाने वाली जमीन की माप का भी जिक्र किया गया है।
गोड़धोइया नाले का निर्माण कार्य 1 अप्रैल 2023 से शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट के तहत 9.20 किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण और 17.94 किलोमीटर लंबी इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन डालने का कार्य किया जाना है। इसके अलावा, 38 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 61 एमएलडी का मेन पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) भी बनाया जा रहा है। अब तक 51 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट में देरी की बात सामने आई है।
प्रोजेक्ट में देरी की मुख्य वजह नाले की जद में आ रहे मकानों का न हटना है। बशारतपुर और शाहपुर क्षेत्रों में 30 मकानों के मालिक मुआवजा लेने के बाद भी अपने मकान नहीं तोड़ रहे हैं। इसके अलावा 66 मकान ऐसे हैं, जिन्हें पूरी चौड़ाई में खाली नहीं किया गया है। अन्य 36 मकानों के कारण 1.80 किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण कार्य बाधित हो रहा है।
उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार ने इस मामले में कहा कि मकान मालिकों को समझाकर जल्द से जल्द निर्माण हटाने के लिए कहा जा रहा है। वर्तमान स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है। अगर लोग निर्धारित समय के भीतर मकान खाली नहीं करते हैं, तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से मकान की दीवारों पर लिखे नोटिस के बाद प्रभावित क्षेत्रों में तनाव की स्थिति है। लोग प्रशासन की सख्ती के बाद अपने विकल्प तलाश रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्माण में देरी से परियोजना की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं, इसलिए तय समय सीमा में काम पूरा करना जरूरी है।
इस परियोजना को गोरखपुर के जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। दरअसल, बारिश से पहले इस परियोजना को पूरा कराने की योजना है ताकि जलभराव जैसी स्थिति से लोगों को निजात दिलाई जा सके।

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