100 साल पुरानी मैगजीन के नाम पर ठगी, गीता प्रेस गोरखपुर ने दर्ज कराया मुकदमा

Fraud in the name of 100 year old magazine, Geeta Press Gorakhpur filed a case

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। गोरखपुर में स्थापित गीता प्रेस से जुड़ा एक फर्जी वाड़े का मामला मध्य प्रदेश में सामने आने के बाद साइबर सेल की टीम सक्रिय हो गई है। इस बारे में गीता प्रेस प्रबंधन ने साइबर सेल और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि संस्था के नाम पर कोई मध्य प्रदेश में कल्याण पत्रिका का वार्षिक सदस्य बनाने के लिए धनउगाही कर रहा है। संस्था द्वारा इसकी शिकायत मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस में भी की गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद साइबर सेल सक्रिय हो गया है। जल्द ही दोषी के खिलाफ कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है।
शनिवार की सुबह गीता प्रेस प्रबंधन को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से किसी ने फोन कर पूछा कि क्या आपकी संस्था द्वारा वार्षिक सदस्य बनाने के लिए रसीद काटी जा रही है? ऐसा सुनते ही प्रबंधन की ओर से जवाब मिला कि नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। हमारी तरफ से संस्था किसी प्रकार का वार्षिक सदस्य बनाने के लिए रसीद नहीं कटवा रही।यह सुनने के बाद सामने वाले ने कहा कि मध्य प्रदेश के कई घरों में ऐसी रसीद काट कर वार्षिक सदस्य बनाया जा रहा है। इसकी जानकारी होते ही प्रबंधन के कान खड़े हो गए। उन्होंने तत्काल इसकी शिकायत मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस को देने के साथ ही गोरखपुर साइबर थाने में अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। इस बारे में साइबर सेल एसपी का कहना है कि गीता प्रेस प्रबंधन की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया है। जल्द ही दोषियों तक पहुंचा जाएगा और कार्रवाई होगी।
गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि कल्याण पत्रिका को लेकर मध्य प्रदेश में रसीद काटने की बात सामने आई है। प्रबंधन ज्यादातर काम ऑनलाइन करता है। लोगों को सदस्य बनाने की प्रक्रिया संस्था द्वारा स्थापित स्टॉल या बुक डिपो से ही की जाती है। इसके लिए किसी प्रकार की रसीद काटने का प्रावधान नहीं है। यह पत्रिका हनुमान प्रसाद पोद्दार द्वारा 1926 में शुरू की गई थी। इसके 99 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह 100 वाँ साल चल रहा है। अब तक इस पत्रिका की 16 करोड़ 26 लाख प्रतियां छप चुकी हैं। वर्तमान में हर मांह 2 लाख से ज्यादा प्रतियां प्रकाशित होती हैं।

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