गुजरात में मुस्लिमों ने ‘राम मंदिर’ बनाकर हिंदू समाज को सौंपा

अमरेली,(गुजरात)। गुजरात में अमरेली जिले से सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वाली मुहिम सामने आई है। जिले के तटीय इलाके में स्थित राम मंदिर मई, 2021 में आए तौकते चक्रवात से तबाह हो गया था, लेकिन दो साल बाद यह मंदिर से फिर भव्य रूप में लौट आया है। इसे वहां के मुस्लिम समाज ने मुमकिन बनाया है। मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद प्रसिद्ध कथाकार मोरारी बापू की मौजूदगी में इस मंदिर का अनावरण किया गया। अमरेली जिले के जर गांव में सालों पहले एक राम मंदिर का निर्माण किया गया था। इस मंदिर के एक मुस्लिम परिवार ने जमीन दी थी। तौकते तूफान से मंदिर को नुकसान पहुंचा था, लेकिन अब इस मंदिर को फिर ठीक कर दिया गया है। मंदिर को लोकार्पण के मौके पर संत समाज की मौजूदगी रही तो इस मौके पर बीजेपी नेता दिलीप संघाणी और कांग्रेस के दिवंगत नेता मुमताज पटेल भी मौजूद रहीं।
सौहार्द कायम रखने का लिया फैसला
तौकते चक्रवात में मंदिर को नुकसान पहुंचने पर वहां के स्थानीय निवासी दाऊदभाई ललिया के परिवार ने सालों पुराने सौहार्द को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसके लिए दाऊद भाई के परिवार न सिर्फ मंदिर के पुर्ननिर्माण का फैसला लिया बल्कि उसके परिसर के विस्तार का फैसला लिया, ताकि गांव में मौजूद आपसी भाईचारे की विरासत को आगे बढ़ाया जा सके। इसके लिए और जमीन की जरूरत पड़ी तो ललिया परिवार ने वह जमीन भी डोनेट की।

ललिया परिवार ने मंदिर में विवि विधान से भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद पूर गांव के लोगों को भोज में बुलाया। जर गांव की कुल आबादी 1200 लोगों की है। इसमें मुस्लिमों की संख्या 100 के करीब है। इस मौके पर दाऊदभाई ने कहा जर में हमने कभी एक-दूसरे को हिंदू और मुस्लिम नहीं माना। हमारे गांव में सांप्रदायिक भाईचारा एक परंपरा रही है। हम प्रार्थना करते हैं कि धार्मिक माहौल अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा बना रहे। दाऊदभाई ने कहा कि उनका यह सपना था कि मोरारी बापू मूर्ति स्थापना समारोह में मौजूद रहें। कार्यक्रम में कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल की बेटी मुमताज न कहा कि भारत के गांवों में अभी सांप्रदायिक सद्भाव है। इससे बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखती है।

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