भारत के खिलाफ चीन की बड़ी चाल, 6 एयरबेसों को किया अपग्रेड

लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक टेंशन,भारतीय सीमा से सटे इलाकों में हैं चीनी एयरबेस

बीजिंग/एजेंसी। चीन, भारतीय सीमा पर लगातार अपनी हवाई शक्ति में इजाफा कर रहा है। हाल में ही खुलासा हुआ है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सटे अपने 6 PLA एयरबेस को अपग्रेड किया है। इन एयरबेसों पर कई अडवांस फाइटर जेट्स के अलावा मिलिट्री ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को भी तैनात किया गया है। इससे चीन की सीमा पर भारत की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। इसके जवाब में भारत ने भी चीन से लगी सीमा पर अपने एयरबेसों को अपग्रेड कर अत्याधुनिक हथियारों को तैनात किया है। इनमें राफेल लड़ाकू विमान से लेकर आकाश और एस-400 मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल में ही भारतीय सीमा से सटे चीन के पांच बेस की सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि इन्हें 2024 से नए एप्रन स्पेस, इंजन टेस्ट पैड और सपोर्ट स्ट्रक्चर के साथ अपग्रेड किया जा रहा है। कुछ तस्वीरों में ड्रोन भी दिखाई दे रहे हैं, जो चीनी वायुशक्ति का मुख्य आधार है। रिपोर्ट में जिन तस्वीरों का जिक्र है, वे टिंगरी, लहुंजे, बुरांग, युटियन और यारकंट में नए एयरबेस की हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मूल निर्माण सबसे पहले 2016 में यारकंट और 2019 में युटियन में शुरू हुआ था। टिंगरी, लहुंजे और बुरांग में 2021 में शुरुआती निर्माण गतिविधि देखी गई। तब से, सभी को अपग्रेड किया गया है। हालांकि भारतीय वायु सेना की चीन की इन हरकतों को लेकर सतर्क है। रिपोर्ट में भारतीय वायु सेना ने कहा, “हमारे पास अपने तंत्र हैं, और हम खुद को जागरूक रखते हैं।” माना जाता है कि इन एयरबेसों के चालू होने से हिमालयी सीमा पर भारतीय वायु सेना को पारंपरिक रूप से मिलने वाला एक महत्वपूर्ण लाभ समाप्त हो जाएगा।
रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि टिंगरी, लहुंजे और बुरांग जैसे एयरबेस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब, 25-150 किलोमीटर के भीतर स्थित हैं। यह निकटता चीनी वायु सेना को अपने लड़ाकू विमानों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को अग्रिम मोर्चों पर तुरंत तैनाती और सीमा पर तनाव बढ़ने की स्थिति में कम समय में प्रतिक्रिया करने का मौका देती है। चीन के ये एयरफील्ड अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख में स्थित भारतीय सैन्य ठिकानों को कवर करने में सक्षम हैं।
दरअसल, तिब्बत में स्थित चीनी एयरबेस काफी ऊंचाई पर स्थित हैं। ऐसे में इन इलाकों में विमानों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को अधिक ऊंचाई पर उड़ना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप हवा का कम घनत्व पारंपरिक रूप से चीनी वायु सेना के हवाई संचालन को प्रभावित करता है। इससे चीनी लड़ाकू विमानों को कम पेलोड और कम इंजन परफॉर्मेंस के साथ उड़ान भरनी होती है। दूसरी ओर भारतीय वायु सेना को कभी भी इस तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है, क्योंकि हमारे अधिकांश एयरबेस मैदानी इलाकों में स्थित हैं। ऐसे में हवा का घना घनत्व लड़ाकू विमानों को हथियारों और ईंधन से भरा पूरा लोड लेकर उड़ान भरने में सक्षम बनाता है।

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