नोएडा-गाजियाबाद के 21 लाख से अधिक श्रमिकों को मिलेगा बढ़े हुए वेतन का लाभ, 37 लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत

उत्तर प्रदेश में 37 लाख से अधिक श्रमिकों को बढ़े हुए वेतनमान का लाभ मिलेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के 21 लाख से अधिक श्रमिकों को होगा, जहां प्रदेश की आधी से ज्यादा औद्योगिक गतिविधियां केंद्रित हैं।
लखनऊ/एजेंसी। प्रदेश में बढ़े हुए वेतनमान का सबसे बड़ा फायदा औद्योगिक हब बने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के श्रमिकों को मिलेगा। इन दोनों जिलों में ही आधे से ज्यादा श्रमिक कार्यरत हैं। वेतन वृद्धि का सबसे ज्यादा असर यहीं दिखाई देगा। प्रदेश में 32,124 फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। इन फैक्ट्रियों में करीब 37 लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं।
औद्योगिक दृष्टि से सबसे आगे गौतमबुद्धनगर है, जहां 8,908 फैक्ट्रियों में 17,87,667 श्रमिक काम कर रहे हैं। दूसरे स्थान पर गाजियाबाद है, जहां 3,955 फैक्ट्रियों में 3,61,772 श्रमिक कार्यरत हैं। इन दोनों जिलों में ही 21 लाख से अधिक श्रमिक हैं, जिन्हें बढ़े हुए वेतनमान का सीधा लाभ मिलेगा। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा जिलों में केंद्रित है। ऐसे में वेतन बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर भी इन्हीं औद्योगिक जिलों में देखने को मिलेगा, जबकि छोटे जिलों में इसका प्रभाव सीमित रहेगा।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत प्रदेश के 74 अनुसूचित नियोजनों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मूल वेतन दर और परिवर्तनीय महंगाई भत्ता तय किया गया है। इनमें रबर, प्लास्टिक, मिष्ठान (मिठाई), एरोटेड ड्रिंक्स, फलों के जूस का निर्माण, प्लाइवुड, पेट्रोल पंप, डेयरी, सिले कपड़ों का निर्माण, बांध और तटबंध निर्माण, ढलाई घर, धातु उद्योग, टिन प्रिंटिंग और ऐसे इंजीनियरिंग उद्योग शामिल हैं जहां 50 से कम कर्मचारी काम करते हैं।
प्रदेश के शीर्ष पांच जिले (फैक्ट्री व श्रमिक संख्या)
जिला – फैक्ट्री – श्रमिक
गौतमबुद्धनगर- 8,908- 17,87,667
गाजियाबाद- 3,955-3,61,772
कानपुर नगर- 1,934- 1,44,572
आगरा- 1,374- 1,45,381
मेरठ – 1,349- 84,159
सबसे कम फैक्ट्रियों वाले जिले
जिला- फैक्ट्री- श्रमिक
चित्रकूट- 8- 222
श्रावस्ती- 16- 373
सिद्धार्थनगर- 20- 642
बांदा- 21- 494
कासगंज- 30- 1666




