दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में 600 करोड़ के कथित घोटाले पर बड़ा एक्शन, दो अधिकारी गिरफ्तार

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली स्टेट हेड

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में करीब 600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हेल्थ सर्विसेज की पूर्व डायरेक्टर जनरल (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले एसीबी ने 18 जून को सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के प्रमुख डॉ. विजय कुमार रंगा को भी गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, यह घोटाला दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरण, दवाइयों और अन्य सामान की खरीद से जुड़ा है।
बताया जा रहा है कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी, जो डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) के तहत कार्य करती है, का उद्देश्य कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सामान उपलब्ध कराना था। लेकिन आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने निजी कंपनियों के साथ मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर सामान को कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा।
एसीबी की जांच में सामने आया है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और अन्य सर्जिकल सामग्री अत्यधिक बढ़ी हुई कीमतों पर खरीदी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, एक्स-रे मशीन की कीमत में 230 प्रतिशत, बेडशीट में 200 प्रतिशत, सी-आर्म उपकरण में 340 प्रतिशत और ओआरएस में 500 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन ओआरएस पैकेट की बाजार कीमत लगभग 2.5 रुपये थी, उन्हें ई-प्रोक्योरमेंट के जरिए 15 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से खरीदा गया। इसी तरह 150 रुपये की बेडशीट को 450 रुपये में खरीदे जाने का आरोप है।
दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसीबी ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। एजेंसी का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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