लखनऊ में भिखारी गिन रही सरकार, जानिए क्या है पूरा प्लान
The government is counting beggars in Lucknow, know what is the complete plan

लखनऊ/एजेंसी। लखनऊ नगर निगम के दायरे में भीख मांगने वालों को चिह्नित करने के साथ ही पुनर्वास के लिए नए सिरे से सर्वे होगा। नगर निगम के आठों जोन में 15 दिन तक अभियान चलाया जाएगा। हर जोन में तीन सदस्यीय समिति गठित करते हुए जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें जोनल अफसर के अलावा अभियान से जुड़ी संस्था उम्मीद और ग्रामीण मानव उत्थान के सदस्यों को शामिल किया गया है।लखनऊ में भीख मांगने वालों के पुनर्वास की योजना को अमली जामा पहनाने के लिए डीएम सूर्यपाल गंगवार ने गुरुवार को बैठक करते हुए आदेश जारी किया है। गौरतलब है कि एनबीटी ने भिखारियों के सिंडीकेट को प्रमुखत से उठाया था। इसके बाद शासन ने जवाब तलब किया था। अब जिला प्रशासन ने समाधान के लिए कवायद शुरू की है।
कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में नगर आयुक्त, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (नगर पूर्वी), जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और डूडा के परियोजना अधिकारी साथ ही उम्मीद संस्था और ग्रामीण मानव उत्थान संस्थान के सदस्य शामिल हुए। इस दौरान डीएम ने बताया कि ग्रामीण मानव उत्थान संस्था के सर्वे में 5316 भिखारियों चिह्नित हुए थे। इसमें सही पाए गए 3912 भिक्षुकों में से 2916 को मुख्य धारा से जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी। हालांकि अब नए सिरे से सर्वे करवाते हुए सरकार की योजनाओं से जोड़कर पुनर्वास किया जाएगा। इसके तहत आधार कार्ड बनवाने से लेकर आयुष्मान कार्ड, दिव्यांग प्रमाण पत्र, मेडिकल कैम्प, समाज कल्याण एवं महिला कल्याण की योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। बच्चों को शिक्षा भी मुहैया करवाई जाएगी। पहले चरण में सर्वे, दूसरे चरण में मोबिलाइजेशन, तीसरे चरण में शेल्टर और चौथे चरण में पुनर्वास का काम होगा। निगरानी का जिम्मा डूडा के परियोजना अधिकारी को दिया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश पर लखनऊ में भिखारियों के लिए साल 2020 में पुनर्वास योजना लागू हुई थी। नगर निगम को भिखारियों को चिह्नित करने और पुनर्वास का जिम्मा दिया गया। नगर निगम ने उम्मीद और ग्रामीण विकास संस्थान की मदद से काम शुरू किया। सूत्रों के अनुसार संस्थाओं ने काम तो शुरू कर दिया लेकिन अब तक पूरा भुगतान नहीं हुआ है। इसके साथ ही भिक्षुकों के लिए जगह भी तय नहीं हो सकी है। नगर निगम के लिए सभी आठ जोन में जगह देना संभव नहीं था। ऐसे में तेलीबाग, चिनहट, जानकीपुरम और चौक में जगह मांगी गई थी, जो अब तक नहीं मिली है।




