डॉक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आप विधायक प्रकाश जारवाल दोषी करार

नई दिल्ली। राउज एवेन्यू की एक विशेष अदालत ने आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जारवाल को साल 2020 में एक डॉक्टर की खुदकुशी मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया। जारवाल के साथ दो अन्य को भी इस मामले में मुजरिम माना गया। केस डॉक्टर राजेंद्र सिंह (52) की खुदकुशी का है जो साउथ दिल्ली के दुर्गा विहार इलाके में 18 अप्रैल, 2020 को मृत पाए गए थे। मृतक ने सुसाइड नोट में अपने इस कदम के लिए जारवाल को जिम्मेदार ठहराया था। सिंह 2005 से दिल्ली जल बोर्ड के साथ पानी की सप्लाई के कारोबार में शामिल थे। दोषियों की सजा के मुद्दे पर सुनवाई के लिए अदालत ने 13 मार्च की तारीख दी है।
स्पेशल जज एम के नागपाल ने देवली से विधायक और दो अन्य के खिलाफ मामले में बुधवार को अपना फैसला सुनाया। अभियोजन के केस के मुताबिक, जारवाल और उनके साथी मृतक सहित अन्य टैंकर मालिकों से जबरन वसूली करते थे। मृतक के बेटे हेमंत सिंह की शिकायत पर देवली विधानसभा इलाके के विधायक को जबरन वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 9 मई, 2020 में गिरफ्तार किया गया था। जून 2020 में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से छूटे थे।
जारवाल ने अपने बचाव में गवाही देते हुए अदालत से कहा था कि वह बेकसूर हैं। मृतक शारीरिक और मानसिक कष्ट से जूझ रहा था। मृतक का टैंकर एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद बंद किया गया था। 2021 में आप विधायक और मामले में दो अन्य के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। अदालत ने तब अपने आदेश में कहा था कि मौजूदा मामले में प्रकाश जारवाल और कपिल नागर के हाथों मृतक की लगातार प्रताड़ना के आरोप हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया ऐसी परिस्थितियां बन गई थीं कि मृतक के पास खुदकुशी के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा।
जहां तक आरोपी हरीश की बात है तो मृतक की डायरी में तीन जगहों पर उसके नाम के जिक्र के सिवा ऐसा कुछ और नहीं मिला, जिससे उसके जानबूझकर प्रताड़ित करने या जबरन वसूली में शामिल होने को अनुमान लगाया जा सके। आरोप तय करते हुए अदालत ने कहा था कि जारवाल और नागर ने टैंकर मालिकों और मृतक से वसूली की साजिश रची और धमकी दी कि दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े रहने के लिए उन्हें पैसा का भुगतान करना होगा। दिल्ली विधानसभा 2020 के चुनावों के वक्त पैसों की मांग और बढ़ गई। टैंकर मालिक इस बात से डर गए थे कि अगर वे पैसे नहीं देंगे तो उन्हें डीजेबी के साथ काम करने नहीं दिया जाएगा। अदालत ने माना था कि आरोपियों ने मृतक और उसके परिवार वालों को जान से मारने तक की धमकी दी थी।

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