फतेहपुर में बेड पर न तकिया, न चादर, धुलाई के नाम पर जिला चिकित्सालय में हर माह लाखों का खेल

फतेहपुर/उत्तर प्रदेश। जिला चिकित्सालय में चादर और तकिया धुलाई के नाम पर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि आधे से ज्यादा बेडों पर चादरें नदारद हैं और किसी भी बेड पर तकिया नजर नहीं आता। अस्पताल प्रशासन दावा करता है कि सभी 118 बेडों पर रोजाना चादर व तकिया बदले जाते हैं।
अस्पताल की पड़ताल में कई बेडों पर गंदी और फटी हुई चादरें मिलीं। कुछ बेडों पर चादरें ही नहीं थीं। लॉन्ड्री कर्मचारियों ने बताया कि वे प्रतिदिन 200 चादरें धुलकर देते हैं और अस्पताल की बिजली से ही मशीनें चलती हैं। इसके बावजूद मरीजों को साफ-सुथरी चादरें और तकिए नहीं मिल पा रहे।
बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को हल्का नीला, शनिवार को बैंगनी और रविवार को लाल या भूरा। बावजूद इसके, अस्पताल में अधिकतर बेडों पर सफेद रंग की चादरें ही दिखीं। मंगलवार को नारंगी रंग की चादर बिछाने का नियम है, लेकिन एक भी बेड पर नारंगी चादर नहीं मिली।
पुरुष वार्ड में कुछ बेड पर चादरें नहीं बिछी थीं, जबकि कुछ पर गंदी चादरें थीं। किसी भी मरीज के पास तकिया नहीं दिखा। मरीज हरिशचंद्र (खागा) ने बताया— “सिर्फ एक बार चादर बदली जाती है। ठंड बढ़ने पर कंबल मांगा तो नहीं मिला, घर से लाना पड़ा।”
महिला वार्ड में सभी बेडों पर चादरें तो थीं मगर तकिए कहीं नहीं मिले। मंगलवार को नारंगी रंग की चादर का नियम होने के बावजूद कोई भी बेड निर्धारित रंग से सजा नहीं था। पोषण पुनर्वास केंद्र के 10 में दो बेडों पर फटी चादरें मिलीं। किसी भी बेड पर तकिया नहीं था। जचा-बच्चा वार्ड की स्थिति भी ऐसी ही रही।

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