दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों पर गबन का आरोप, एलजी ने दी मुकदमा चलाने की अनुमति
Two Delhi Police officers accused of embezzlement, LG gives permission to prosecute

नई दिल्ली/एजेंसी। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सरकारी धन के गबन और जालसाजी के मामले में दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। आरोपी हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा और कांस्टेबल खुशी राम पर लाइसेंसिंग यूनिट में फीस वसूली के दौरान फर्जी रसीदें जारी कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
यह मामला आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज है। जांच में पता चला कि वर्ष 2016 से 2018 के बीच जब लाइसेंस (शस्त्र लाइसेंस, होटल, गेस्ट हाउस, प्रेस व अन्य) के नवीनीकरण और जारी करने की फीस जमा की जा रही थी, तो कई बार फर्जी रसीदें जारी की गईं। इन फर्जी रसीदों से एकत्र की गई राशि को सरकारी खाते में दर्ज नहीं किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
जांच में पता चला कि आरोपी कर्मचारियों ने असली रसीदों जैसी दिखने वाली फर्जी रसीदें बनाईं और नकदी जमा कर धोखाधड़ी की। सबसे ज्यादा अनियमितताएं ”’शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण काउंटर नंबर-2”” पर पाई गईं, जहां हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा तैनात थे।
जांच में यह भी पता चला है कि कंप्यूटर से कई महत्वपूर्ण फाइलें डिलीट कर दी गई हैं और दस्तावेज गायब हैं। उपराज्यपाल ने भारतीय दंड संहिता की धारा 197 (गलत प्रमाण पत्र जारी करने या हस्ताक्षर करने से संबंधित) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है और गृह विभाग को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 140 के तहत कार्रवाई पर भी पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
फोरेंसिक रिपोर्ट और चार्जशीट में दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा पर लाइसेंस नवीनीकरण काउंटर नंबर-दो पर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा करने का आरोप है, जबकि कांस्टेबल खुशी राम पर मिलीभगत का शक है। अब दोनों पुलिसकर्मियों पर आपराधिक साजिश, जालसाजी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कोर्ट में मुकदमा चलेगा।
जांच में यह भी पता चला है कि कंप्यूटर से कई महत्वपूर्ण फाइलें डिलीट कर दी गई हैं और दस्तावेज गायब हैं। उपराज्यपाल ने भारतीय दंड संहिता की धारा 197 (गलत प्रमाण पत्र जारी करने या हस्ताक्षर करने से संबंधित) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है और गृह विभाग को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 140 के तहत कार्रवाई पर भी पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
फोरेंसिक रिपोर्ट और चार्जशीट में दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा पर लाइसेंस नवीनीकरण काउंटर नंबर-दो पर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा करने का आरोप है, जबकि कांस्टेबल खुशी राम पर मिलीभगत का शक है। अब दोनों पुलिसकर्मियों पर आपराधिक साजिश, जालसाजी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कोर्ट में मुकदमा चलेगा।




