दिल्ली में सरकारी लापरवाही उजागर, नंदनगरी में सील दुकान में 15000 किलो राशन सड़ा
तीन हजार लोगों का एक माह का भोजन बर्बाद हुआ।

दिल्ली ब्यूरो। नंदनगरी इलाके में सरकारी लापरवाही से हजारों लोगों का भोजन बंद राशन की दुकान में सड़ गया। जिस राशन को तीन हजार लोग लगभग एक माह तक खा सकते थे, उसमें अब कीड़े लग गए हैं। सरकारी राशन के कोटे में गड़बड़ी के चलते दुकान को आपूर्ति विभाग ने सील तो कर दिया लेकिन 15 हजार किलो अनाज अंदर ही सड़ता रहा। अब दुकान के अंदर के हालात ऐसे हैं कि बोरे गल चुके हैं और उनमें पनपे घुन व कीड़े अब आसपास के मकानों में घुस रहे हैं। स्थानीय लोग बदबू और कीड़ों से त्रस्त हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
आपूर्ति विभाग को कई शिकायतें दी हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दरअसल, गत 20 नवंबर को आपूर्ति विभाग की टीम नंद नगर सी-2 ब्लाक में स्थित इस दुकान की जांच करने पहुंची तो रिकार्ड में दर्ज 42.62 टन गेहूं के स्थान पर सिर्फ 12.65 टन ही मिला। वहीं, चावल 28.29 टन के स्थान पर सिर्फ 3.35 टन मिला और रिकाॅर्ड में दर्ज 0.157 टन चीनी मिली ही नहीं।
इसके बाद टीम ने इस दुकान को सील करते हुए कैंसिल भी कर दिया। इसके बाद से यहां मौजूद लगभग 12 हजार किलो गेहूं और तीन हजार किलो चावल दुकान में ही सड़ रहा है। आपूर्ति विभाग इस कदर लापरवाह हो गया है कि न सिर्फ हजारों किलो अनाज की बर्बादी हो रही है बल्कि लोग कीड़ों के चलते बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से दुकान संचालक सीलिंग के दो दिन बाद आया और सील तोड़कर अंदर अपना गल्ला और रुपये निकाल ले गया। जिस मकान में नीचे यह दुकान है उसकी मालकिन सुदेश ने बताया कि उन्होंने कहा था कि अनाज भी निकाल लो लेकिन वह रुपये निकालकर ताला मारकर चलता बना।
दुकान सील करते हुए आपूर्ति विभाग ने भी यह नहीं सोचा कि जितना अनाज दुकान में बंद है उससे लगभग तीन हजार लोग एक माह तक भोजन कर सकते हैं। आपूर्ति विभाग एक व्यक्ति को पांच किलो प्रतिमाह अनाज देता है। ऐसे में 15 हजार किलो अनाज एक माह तक तीन हजार व्यक्तियों के काम आ सकता था।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि सीलिंग के कुछ दिन बाद ही अनाज सड़ना शुरू हो गया था। इसके बाद उन्होंने आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को मामले की शिकायत दी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने स्थानीय विधायक और आपूर्ति विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर के कार्यालय में भी शिकायत दी। वहां से आश्वासन मिला था कि एक सप्ताह में अनाज हटवा देंगे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।




