अंतरराष्ट्रीय पुलिसिंग और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का अनुभव लेकर सागर पहुंचे नए एसपी संजीव सिन्हा
लाइबेरिया में 200 से ज्यादा विदेशी पुलिस अफसरों की कमान संभाल चुके आईपीएस संजीव सिन्हा अब सागर में अपराधियों पर शिकंजा कसेंगे। संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन से लेकर मध्य प्रदेश के कई जिलों में पुलिसिंग का अनुभव रखने वाले सिन्हा को सागर का नया एसपी बनाया गया है।

सागर,मध्य प्रदेश। अंतरराष्ट्रीय पुलिसिंग, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई और मध्य प्रदेश के कई चुनौतीपूर्ण जिलों में कानून-व्यवस्था संभालने का अनुभव रखने वाले भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संजीव सिन्हा ने सागर के नए पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। पदभार संभालने के बाद शनिवार दोपहर उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक इरशाद वली से औपचारिक मुलाकात की। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण, पीड़ितों को न्याय दिलाना और पुलिस व्यवस्था को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी।
अपनी कार्यशैली के बारे में उन्होंने कहा कि वह टीम भावना में विश्वास रखते हैं। पुलिस की सफलता सामूहिक प्रयास, अनुशासन और बेहतर समन्वय पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के साथ महिला एवं बाल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संजीव सिन्हा के पुलिस करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अफ्रीकी देश लाइबेरिया में उनकी तैनाती रहा है। वहां उन्होंने उप संचालन समन्वयक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के 29 पुलिस थानों में से 19 के संचालन और 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुलिस अधिकारियों के कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी। उन्होंने लाइबेरिया की राष्ट्रीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय कर आधुनिक पुलिसिंग पद्धतियों को लागू करने में भी योगदान दिया। उनके कार्य की संयुक्त राष्ट्र पुलिस प्रमुख ने सराहना की थी।
उन्होंने 1 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में उप पुलिस अधीक्षक के रूप में करियर शुरू किया। करीब दो दशक तक राज्य पुलिस सेवा में काम करने के बाद वर्ष 2016 में भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति मिली। तीन दशक से अधिक के सेवाकाल में उन्होंने उज्जैन, इंदौर, होशंगाबाद, बिलासपुर, अलीराजपुर, मंडला, सिंगरौली, धार, डिंडोरी और गुना सहित कई जिलों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
मार्च 2017 से मई 2022 तक वह विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त संगठन में पुलिस अधीक्षक रहे। इस दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच तथा कार्रवाई में उनकी भूमिका रही। सतना नगर निगम आयुक्त से जुड़े 12 लाख रुपये के रिश्वत प्रकरण में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। गुना में पुलिस अधीक्षक रहते हुए हनुमान टेकरी डकैती मामले में पुलिस टीम का नेतृत्व किया और 12 किलोग्राम चांदी बरामद करने में अहम भूमिका निभाई।
अपने सेवाकाल में उन्होंने सांप्रदायिक तनाव, आंदोलन और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चुनौतियों का भी सामना किया। अलीराजपुर में गोधरा घटना के बाद उत्पन्न तनाव के दौरान कानून-व्यवस्था संभाली। नर्मदा बचाओ आंदोलन के दौरान पुलिस प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाई। मंडला में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार की रोकथाम के लिए विश्व वन्यजीव कोष के साथ समन्वय किया और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों की निगरानी में योगदान दिया। सिंगरौली में तीन दिन के कर्फ्यू के दौरान पुलिस बल का नेतृत्व किया, जबकि धार में भोजशाला क्षेत्र में रंगपंचमी का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विभिन्न धार्मिक समूहों के साथ संवाद और समन्वय किया।
उज्जैन में वर्ष 2016 के सिंहस्थ मेले के दौरान उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ ज्योति पदक से सम्मानित किया था। राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की द्वितीय वाहिनी के प्रथम सेनानी के रूप में नई वाहिनी की स्थापना में भी उनका योगदान रहा।
सागर में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले संजीव सिन्हा ग्वालियर में 14वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल के सेनानी के पद पर तैनात थे और वहां पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। अब उनके सामने सागर जिले में अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण की चुनौती होगी। उन्होंने टीम वर्क को अपनी कार्यशैली का आधार बताते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।




