‘1 समोसा 2 मिठाई, कॉकरोचों की होगी पिटाई’, वाराणसी में सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ युवा परिषद का न्याय मार्च
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शन कर रही है। वहीं, यूपी में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में युवा परिषद ने प्रदर्शन किया।

वाराणसी,उत्तर प्रदेश। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवा परिषद के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ न्याय मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के समर्थन में नारेबाजी करते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से इस्तीफे की मांग की। साथ ही सीजेपी से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न बैनर और पोस्टर लहराए तथा विपक्षी नेताओं के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग पर उठाए जा रहे सवालों का विरोध करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले विपक्ष को अपने दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए।
मार्च में शामिल अधिवक्ता एके सिंह ने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर लोगों को संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि युवा परिषद निर्वाचन आयोग के समर्थन में सांकेतिक मार्च निकाल रही है। उनके मुताबिक, यदि विपक्ष के पास निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं के प्रमाण हैं, तो उसे न्यायालय का रुख करना चाहिए। उन्होंने पिछले चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका का समर्थन किया।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि सीजेपी से जुड़े कुछ लोग विदेश से धन प्राप्त कर देश में राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका मार्च निर्वाचन आयोग के प्रति समर्थन जताने और विपक्ष के आरोपों का विरोध करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष अपने रुख में बदलाव नहीं करता है, तो आगे बड़े स्तर पर युवा प्रदर्शन कर सकते हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों में विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग के समर्थक इन आरोपों का विरोध कर रहे हैं। वाराणसी में निकाला गया यह मार्च इसी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है।




