महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा पर फूटा छात्रों का गुस्सा, यौन हिंसा के विरोध में सचिवालय तक निकाला मार्च
राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के नेतृत्व में छात्रों ने दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकाला।

नई दिल्ली। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के नेतृत्व में बुधवार को स्कूल और कॉलेज के दर्जनों छात्रों ने आईटीओ स्थित दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने यौन हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
एसएफआई का आरोप है कि पिछले दो सप्ताह के दौरान राजधानी में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। संगठन के अनुसार, सितंबर में ही ऐसे कम से कम 13 मामले सामने आए हैं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने लेडी श्रीराम कॉलेज के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म, सदर बाजार की एक दर्जी की दुकान में 11 वर्षीय बच्ची के कथित यौन उत्पीड़न और चलती बस में उत्तर प्रदेश की 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामलों का उल्लेख किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि सुरक्षित सार्वजनिक ढांचा, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाएं भी इससे सीधे जुड़ी हैं। एसएफआई ने समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट कराने, पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे और स्ट्रीट लाइट लगाने तथा सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
संगठन ने महिलाओं के लिए सुरक्षा सहायता केंद्र और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय स्थापित करने की मांग भी रखी। इसके अलावा स्कूलों में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाने, लैंगिक एवं यौन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अधिकारियों के लिए अनिवार्य संवेदनशीलता प्रशिक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।
ज्ञापन में सार्वजनिक जवाबदेही डैशबोर्ड बनाने और शैक्षणिक संस्थानों में प्रभावी आंतरिक शिकायत समितियों (आईसीसी) को संवेदनशीलता के साथ काम करने के लिए मजबूत करने की मांग भी शामिल थी। एसएफआई का कहना है कि यौन हिंसा के मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर शिकायतों के प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था जरूरी है।
सभा को संबोधित करते हुए एसएफआई दिल्ली की अध्यक्ष नादिया ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। वहीं, एसएफआई दिल्ली इकाई की संयुक्त सचिव मेहिना ने कहा कि अधिकारियों को यौन हिंसा रोकने पर ध्यान देना चाहिए, न कि महिला छात्रों पर कर्फ्यू, कपड़ों की निगरानी या रात में सार्वजनिक स्थानों पर उनकी आवाजाही सीमित करने जैसे प्रतिबंध लगाने पर।
मार्च के बाद एसएफआई के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव प्रदीप तायल से मुलाकात की और महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी मांगों का ज्ञापन सौंपा।




