सीओ जियाउल हक हत्याकांड में दूसरी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार, परिजनों को न्याय की उम्मीद को झटका

देवरिया के जुआफर गांव निवासी सीओ जियाउल हक की प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में 2013 में हत्‍या हो गई थी। उनके बुजुर्ग माता और पिता गांव में रहते हैं।

देवरिया,उत्तर प्रदेश। प्रतापगढ़ के कुंडा में तैनात रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी जियाउल हक की हत्या के मामले में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 19 सितंबर 2026 को दूसरी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके साथ ही विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया समेत उन लोगों के खिलाफ, जिनके नाम इस मामले में आरोपी के रूप में सामने आए थे, इस मामले में आगे की अदालती कार्रवाई का रास्ता बंद हो गया है। फैसले के बाद जियाउल हक के माता-पिता ने निराशा जताई है।
देवरिया जिले के खुखुंदू थाना क्षेत्र के जुआफर गांव निवासी जियाउल हक प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र में सीओ के पद पर तैनात थे। 2 मार्च 2013 को कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव के प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। घटना के बाद मौके पर मौजूद सीओ जियाउल हक की उग्र भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद उनकी पत्नी परवीन आजाद ने राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई थी।
जियाउल हक के पिता समसुल हक ने कहा कि बेटे को खोने के बाद परिवार को न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद वह उम्मीद भी समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने काफी मेहनत कर बेटे को पुलिस अधिकारी बनाया था। उनका कहना है कि बेटे की मौत के बाद परिवार को लंबे समय तक न्याय की प्रतीक्षा रही।
जियाउल हक की मां हाजरा खातून ने भी फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि बेटे की हत्या के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब वह उम्मीद खत्म हो गई है। उन्होंने परिवार में बाद में पैदा हुई परिस्थितियों का भी उल्लेख किया और कहा कि बेटे की मौत के बाद बहू परवीन आजाद को पुलिस विभाग में विशेष कार्याधिकारी के पद पर नियुक्ति मिली और वह लखनऊ में रहती हैं।
मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद जांच एजेंसी ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। इसके बाद जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की शिकायत पर मामले में दोबारा जांच की गई। दोबारा जांच के बाद भी सीबीआई ने दूसरी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की।
अक्टूबर 2024 में सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि राजा भैया समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या की साजिश और संबंधित आरोपों को लेकर चल रही जांच के बाद दाखिल दूसरी क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत में सुनवाई जारी रही। अब विशेष न्यायाधीश प्रतिभा सिंह की अदालत ने 19 सितंबर 2026 को दूसरी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।
जियाउल हक हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी काफी हलचल हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को स्थिति संभालने के लिए जियाउल हक के गांव का दौरा करना पड़ा था। वर्षों बाद मामले में दूसरी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार होने के साथ ही उन आरोपों को लेकर लंबित न्यायिक प्रक्रिया समाप्त हो गई है, जिनमें राजा भैया समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।

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