फर्जी पत्रकारों का मकड़जाल, सहारनपुर में पिटे यूट्यूबर, पूरे जनपद में वसूली का खेल
ये लोग सोशल मीडिया या यूट्यूब चैनलों पर भ्रामक व नकारात्मक खबरें प्रसारित करने की धमकी देकर पैसे वसूलते हैं। पुलिस ऐसे फर्जी मामलों और रंगदारी मांगने वालेतत्वों के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज कर रही है।

सहारनपुर,उत्तर प्रदेश। जिले के तीतरों थाना क्षेत्र में बाग ठेकेदारों से उगाही करने आए दो कथित यूट्यूबरों की पिटाई और पुलिस को सौंपे जाने के बाद जनपद में फर्जी पत्रकारों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। ये लोग सोशल मीडिया या यूट्यूब चैनलों पर भ्रामक व नकारात्मक खबरें प्रसारित करने की धमकी देकर पैसे वसूलते हैं। सूत्रों के अनुसार कि दोनों युवक शामली से तीतरों आए थे और बाग में वीडियो बनाकर खुद को बड़े चैनल का पत्रकार बताते हुए कथित रूप से वसूली कर रहे थे। मामले की जानकारी मिलने पर थाना प्रभारी ने घटना की जांच कर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
बताया गया कि कुछ लोगों ने अवैध उगाही के आरोप में इन युवकों को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, मामले की जानकारी मिलने पर ईमानदार पत्रकारों की ओर से भी कथित फर्जी पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई है। बताया जाता है कि कुछ लोगों द्वारा मामले को आपसी स्तर पर सुलझाने का प्रयास भी किया गया।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि फर्जी पत्रकारों का कथित जाल सहारनपुर जनपद से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला हुआ है। कुछ लोग फर्जी प्रेस कार्ड, यूट्यूब चैनल, समाचार पोर्टल या सोशल मीडिया के माध्यम से स्वयं को पत्रकार बताकर लोगों पर प्रभाव बनाने का प्रयास करते हैं। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में वीडियो बनाने और खबर प्रकाशित करने की बात कहकर लोगों से कथित रूप से धन की मांग की जाती है।
पत्रकारिता के नाम पर इस तरह की कथित गतिविधियों से वास्तविक पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी व्यक्ति के पास कैमरा, मोबाइल, प्रेस कार्ड या सोशल मीडिया चैनल होना मात्र उसे अधिकृत पत्रकार साबित नहीं करता। समाचार संस्थान से जुड़े होने की वास्तविकता की पुष्टि करना आवश्यक है।
क्षेत्र के जागरूक लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली करता है या किसी को धमकाकर धन मांगता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामलों में लोगों को स्वयं कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस को सूचना देकर लिखित शिकायत करनी चाहिए।
पुलिस से भी अपेक्षा की जा रही है कि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति द्वारा पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली किए जाने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही वास्तविक पत्रकारों और कथित फर्जी पत्रकारों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए संबंधित संस्थानों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
जनता से अपील की गई है कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकार होने का दावा करते हुए अवैध उगाही या दबाव बनाने का प्रयास करता है तो उसके संस्थान और पहचान की पुष्टि की जाए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में पुलिस को तत्काल सूचना दी जा सकती है। आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
पुलिस ऐसे फर्जी मामलों और रंगदारी मांगने वालेतत्वों के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज कर रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट और यूट्यूबरों की संदिग्ध गतिविधियों के चलते पुलिस ने कई लोगों पर शांति भंग और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।




