हैदराबाद के रोहन नायडू की खोज से खगोल विज्ञान में नई हलचल, सामने आई रहस्यमयी ‘ब्लैक होल स्टार’
हैदराबाद में 18 साल की उम्र में इंजीनियरिंग छोड़ने से लेकर यूनिवर्स के कुछ शुरुआती ब्लैक होल्स पर रिसर्च को लीड करने तक रोहन नायडू का सफर बहुत शानदार और ध्यान खींचने वाला रहा है।

वॉशिंगटन/एजेंसी। अंतरिक्ष की गहराइयों में खगोलविदों को एक ऐसी रहस्यमयी खगोलीय वस्तु का पता चला है, जिसने तारों और ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की पारंपरिक समझ को चुनौती दी है। सौर मंडल के आकार के आसपास बताई जा रही यह अत्यंत चमकीली वस्तु गैस के घने बादल से घिरी हुई है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से किए गए अवलोकनों के आधार पर वैज्ञानिकों ने इसे संभावित ‘ब्लैक होल स्टार’ के रूप में अध्ययन किया है।
इस महत्वपूर्ण शोध के केंद्र में हैदराबाद में जन्मे खगोलशास्त्री रोहन नायडू हैं। नायडू के नेतृत्व वाली शोध टीम ने शुरुआती ब्रह्मांड में एक असाधारण रूप से चमकीली लाल खगोलीय वस्तु की पहचान की है, जिसे ‘ब्लैक होल स्टार’ नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वस्तु पृथ्वी से अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और संभवतः बिग बैंग के करीब 660 मिलियन वर्ष बाद अस्तित्व में आई थी।
वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि ‘ब्लैक होल स्टार’ वास्तव में किस प्रकार की खगोलीय वस्तु है। इसके आसपास मौजूद गैस और अत्यधिक चमक के कारण यह सामान्य तारों से अलग दिखाई देती है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसके केंद्र में एक विशाल ब्लैक होल हो सकता है, जिसके आसपास गैस का घना बादल मौजूद है। इसी वजह से इसे ‘ब्लैक होल स्टार’ की संभावित श्रेणी में रखकर अध्ययन किया जा रहा है।
इस खोज का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह ब्रह्मांड के शुरुआती दौर से संबंधित है। यदि आगे के अध्ययन इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं, तो इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि शुरुआती ब्रह्मांड में विशाल ब्लैक होल किस तरह बने और उन्होंने इतनी कम उम्र में इतनी अधिक ऊर्जा कैसे उत्पन्न की।
रोहन नायडू की वैज्ञानिक यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। हैदराबाद में जन्मे नायडू ने महज 18 वर्ष की उम्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने खगोल विज्ञान के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए विदेश का रुख किया। वह सिंगापुर के येल-एनयूएस कॉलेज में शामिल हुए और इसी दौरान उनकी रुचि खगोल विज्ञान के शोध की ओर बढ़ी।
उन्होंने प्रोफेसर चार्ल्स बेलिन के साथ शोध कार्य किया और चिली के एंडीज क्षेत्र में ब्लेजर्स का अध्ययन करते हुए खगोल विज्ञान में अपना शोध सफर आगे बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर चार्ली कॉनरॉय के मार्गदर्शन में पीएचडी की और प्राचीन आकाशगंगाओं पर शोध किया।
पीएचडी पूरी करने के बाद रोहन नायडू ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में नासा हबल फेलोशिप और पप्पलार्डो फेलोशिप के पदों पर काम किया। वर्तमान में वह हवाई विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत बताए जाते हैं।
नायडू की टीम द्वारा की गई पहचान शुरुआती ब्रह्मांड को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिग बैंग के लगभग 660 मिलियन वर्ष बाद की किसी खगोलीय वस्तु का अध्ययन वैज्ञानिकों को उस समय की परिस्थितियों, आकाशगंगाओं के निर्माण और विशाल ब्लैक होल के विकास के बारे में नई जानकारी दे सकता है।
रोहन नायडू ने इस खोज को असाधारण भौतिकी से जुड़ा विषय बताते हुए कहा है कि उनकी टीम एक नए प्रकार की खगोलीय वस्तु का अध्ययन करने को लेकर उत्साहित है और इस दिशा में अभी काफी शोध किया जाना बाकी है। वैज्ञानिक अब इस रहस्यमयी वस्तु के बारे में और अधिक जानकारी जुटाने के लिए आगे के अवलोकनों और विश्लेषण पर ध्यान दे रहे हैं।
अगर भविष्य के अध्ययन ‘ब्लैक होल स्टार’ की मौजूदा व्याख्या की पुष्टि करते हैं, तो यह खोज शुरुआती ब्रह्मांड में ब्लैक होल के निर्माण और उनके विकास को समझने के लिए खगोल विज्ञान में एक नई दिशा खोल सकती है।




