कानपुर में 4.93 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा: संस्था खाते से 31,800 खातों में ट्रांसफर, सचिव की भूमिका संदिग्ध

पुलिस ने कानपुर में 4.93 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा किया है, जिसमें संस्था के सचिव को 30% कमीशन के लालच में फंसाया गया था।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। शहर में करोड़ों की साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने एक संस्था के बैंक खाते का इस्तेमाल कर 4.93 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर दी। यह रकम देशभर में ऑनलाइन गेम खेलने वाले करीब 31,800 खातों में ट्रांसफर की गई। मामले की जांच में संस्था के सचिव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, कल्याणपुर निवासी शिक्षक आशीष कुमार सिंह ‘रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति’ के सचिव हैं। बीते वर्ष 21 से 25 नवंबर के बीच संस्था के खाते में विभिन्न राज्यों के 52 लोगों से ठगे गए 4.93 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। ठगी के शिकार लोगों ने इस संबंध में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी।
जांच के दौरान साइबर सेल ने जब आशीष कुमार सिंह से पूछताछ की, तो उन्होंने खुद को पीड़ित बताते हुए दावा किया कि डोनेशन दिलाने के बहाने उन्हें 21 नवंबर 2025 को लखनऊ बुलाकर कुछ लोगों ने बंधक बना लिया था और उनका मोबाइल छीनकर खाते से लेन-देन किया गया। हालांकि पुलिस जांच में यह कहानी संदिग्ध पाई गई।
पुलिस की पड़ताल में संतकबीर नगर और बस्ती जिले से जुड़े आरोपितों के नाम सामने आए। इसके बाद संतकबीर नगर के बखीरा थाना क्षेत्र निवासी राहुल चौधरी, गोरखपुर के हरपुर मदहट निवासी शुभेंद्र प्रकाश मिश्र उर्फ शुभम और गगहा थाना क्षेत्र निवासी राज सिंह को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपितों ने खुलासा किया कि आशीष कुमार सिंह को बंधक नहीं बनाया गया था, बल्कि उन्हें कमीशन का लालच दिया गया था। आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि संस्था के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर की जाएगी, जिसमें 70 प्रतिशत राशि वापस ले ली जाएगी और शेष उनके खाते में रहेगी। इसी योजना के तहत उन्हें लखनऊ के सुलतानपुर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में बुलाया गया, जहां उन्हें एक लाख रुपये एडवांस भी दिया गया।
आरोपितों के अनुसार, आशीष के मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टॉल कर बैंकिंग और फोन का पूरा एक्सेस विदेशी साइबर ठगों को दे दिया गया, जो कथित तौर पर कंबोडिया से संचालित हो रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि लखनऊ निवासी सौरभ पांडेय साइबर ठगों को प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड उपलब्ध कराता था।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। साथ ही जिस बैंक में संस्था का खाता खुला, उसके मैनेजर की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि खाता खोलते समय संदिग्ध परिस्थितियों में संपर्क स्थापित कराया गया था। फिलहाल, आशीष कुमार सिंह ने अपने बयान पर कायम रहते हुए फिर दावा किया है कि उन्हें बंधक बनाया गया था। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा होने की उम्मीद है।

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