मथुरा में आधे घंटे की झमाझम बारिश से सड़कें बनीं तालाब, पहली ही बारिश में शहर डूबा, नगर निगम के दावों की खुली पोल
मथुरा में शुक्रवार दोपहर करीब आधे घंटे तक हुई झमाझम बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी, लेकिन शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई।

मथुरा/उत्तर प्रदेश। शुक्रवार को मथुरा में मौसम ने अचानक करवट लेते हुए लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी, लेकिन इसके साथ ही शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो गई। दोपहर में करीब आधे घंटे तक हुई झमाझम बारिश के चलते जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं सड़कों पर पानी भरने से यातायात बाधित हुआ और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
तेज हवाओं के साथ मानसून की पहली ही बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन की मानसून पूर्व तैयारियों की पोल खोल कर रख दी। महज कुछ मिनट की बारिश में श्रीकृष्ण जन्मभूमि शहर की सड़कें डूब, जिसके चलते यहां की प्रमुख सड़कें, चौराहे और रेलवे अंडरपास जलमग्न हो गये। आम लोगों और दूर-दराज से मथुरा नगरी पहुंचे श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मथुरा शहर में सबसे खराब स्थिति श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास मथुरा-वृंदावन रोड, भूतेश्वर चौराहा, नया बस स्टैंड, द्वारकाधीश मंदिर मार्ग और कंकाली रोड की रही। यहां सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, सडकों पर घुटनों तक पानी भरने के कारण राहगीरों को पैदल चलने में भी दिक्कत महसूस हुई, कई स्थानों पर सड़क तथा नाले का अंतर तक समझ में नहीं आ रहा था। सड़कों पर जलभराव के कारण हादसों का खतरा भी मंडराता हुआ दिखाई दिया।
देश-विदेश से श्रीकृष्ण जन्मस्थली के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को नालों के गंदे और बदबूदार पानी के बीच होकर गुजरना पड़ रहा था। जलमग्न हुई सड़कों पर पैदल चलना कठिन लग रहा था, वहीं पानी के तेज बहाव के कारण कई वाहनों की रफ्तार थम गई, वाहन चालक रास्ता पार करने का साहस भी जुटा नही पा रहें थे। द्वारकाधीश मंदिर के आसपास का नजारा देखकर ऐसा लग रहा था, मानो यमुना का पानी शहर की गलियों में उतर आया हो।
मथुरा नगरी में जलभराव के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमा गई। जहां ई-रिक्शा, कारें और दोपहिया वाहन पानी में रूक गए, ऐसे में वाहन स्वामी को पानी से बाहर वाहन लाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। आईएसबीटी बस स्टैंड सहित कई शहर के मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। जिसके चलते कई जगह लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक को ही आने-जाने का रास्ता बना लिया। भूतेश्वर समेत कई रेलवे अंडरपासों में गर्दन तक पानी भर गया, जिसके चलते वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। वहीं तेज बहाव में दोपहिया वाहनों के बहने की तस्वीरे भी सामने आईं। अंडरपास बंद होने से वैकल्पिक मार्गों पर भी भारी जाम की स्थिति बन गई।
बारिश थमने के काफी देर बाद भी सड़कों से पानी नहीं निकला। इससे साफ हो गया कि शहर की जल निकासी व्यवस्था पहली ही परीक्षा में विफल साबित हुई। जाम नालियों के कारण गंदा पानी सड़कों से होते हुए निचले इलाकों और कई घरों तक पहुंच गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर साल ऐसे ही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से नालों की नियमित सफाई, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और मानसून से पहले प्रभावी तैयार करें ताकि लोगों और श्रृद्धालुओं को मुसीबत का सामना न करना पड़े।
बड़ा सवाल
आधा घंटे की पहली ही बारिश में जब मथुरा की सड़कें, अंडरपास और मुख्य मार्ग जलमग्न हो गए, तो पूरे मानसून के दौरान शहर की स्थिति कैसी होगी? क्या नगर निगम और जिला प्रशासन इस बार जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगे, या फिर हर साल की तरह लोगों को राहत देने वाली बारिश आफत लगेगी?




