यूपी एनईईटी यूजी 2025 में फर्जीवाड़ा उजागर,डॉक्टर बनने को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित का लगाया फर्जी प्रमाणपत्र, कौशांबी में मुकदमा दर्ज
यूपी नीट यूजी 2025 में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के जरिए प्रवेश लेने वाले विवेक ठाकुर पर बलिया में मुकदमा दर्ज हुआ है। जांच में प्रमाण पत्र कूटरचित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई, जिसकी विवेचना अब कौशांबी ट्रांसफर कर दी गई है।

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशांबी/उत्तर प्रदेश। यूपी नीट यूजी-2025 प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी में प्रवेश पाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र लगाने का मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच में प्रमाणपत्र जाली और कूटरचित पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ बलिया जिले की नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है, जबकि मामले की विवेचना कौशांबी स्थानांतरित कर दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलिया जिले के पखनपुरा निवासी विवेक ठाकुर ने यूपी नीट यूजी-2025 की प्रथम चरण की काउंसिलिंग में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित उपश्रेणी के अंतर्गत प्रवेश प्राप्त करने के लिए प्रमाणपत्र संख्या 128/रास-2, दिनांक 2 जुलाई 2025 प्रस्तुत किया था। महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देश पर प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया गया।
जिलाधिकारी के आदेश पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने एक सितंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत प्रमाणपत्र जिलाधिकारी कार्यालय बलिया से जारी ही नहीं किया गया था। साथ ही प्रमाणपत्र पर अंकित जिलाधिकारी के हस्ताक्षर और कार्यालय की मुहर भी फर्जी पाई गई।
रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने चार सितंबर 2025 को संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके तहत तहसीलदार सदर अतुल हर्ष ने नगर कोतवाली बलिया में तहरीर देकर आरोपी के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कौशांबी के सीओ सिटी शिवांक ने बताया कि विवेचना बलिया से स्थानांतरित कर कौशांबी लाई गई है, क्योंकि आरोपित का दाखिला यहां के मेडिकल कॉलेज में हुआ है। उन्होंने कहा कि जांच में दोष सिद्ध होने पर आरोपी के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में ऐसे फर्जीवाड़े के करीब 15 मामले सामने आए हैं, जिनमें विभिन्न जनपदों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इस पूरे मामले ने चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।




