आजमगढ़ के स्कूलों में यूट्यूबरों के घुसने पर लगी लगाम, विभाग ने पत्र जारी कर दिए दिशा निर्देश
आजमगढ़ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों और यूट्यूबरों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम स्कूलों में वीडियो बनाने से शिक्षकों की गरिमा और पठन-पाठन पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए उठाया गया है।

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। सोशल मीडिया पर एक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का पत्र वायरल हो रहा है। जारी पत्र में कहा गया है कि कुछ बाहरी तत्व और यूट्यूबर स्कूलों में आकर वीडियो बना रहे हैं और स्कूल व शिक्षकों का वीडियो सोशल मीडिया में डाल रहे हैं। जिसकी वजह से विभाग का काम काज प्रभावित हो रहा है।
पत्र में बताया गया है कि सोशल मीडिया में वीडियो प्रसारित होने से शिक्षकों की गरिमा ही नहीं शिक्षा विभाग में पठन पाठन का काम भी प्रभावित हो रहा है। बताया गया कि विभाग की ओर से पूर्व में ही जांच अधिकारी नियुक्त हैं। ऐसे में यूट्यूबरों का किसी भी सूरत में प्रवेश विद्यालय में निषिद्ध किया जाता है। पत्र में यह भी कहा गया है कि बिना किसी अधिकृत अधिकारी के अनुमति के बिना प्रवेश प्रतिबंधित है। विद्यालय परिसर में फोटो और वीडियो लेना प्रतिबंधित किया जाता है।
पत्र जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। जबकि पत्र की प्रतिलिपि महानिदेशक, डीएम, सीडीओ, सचिव, डायट प्राचार्य, सहायक शिक्षा निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को किया गया है। पत्र के अनुसार यह 31 जुलाई को जारी किया गया है। पत्र जारी होने के बाद से ही शिक्षकों के बीच इस पत्र को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
इस बाबत जिले के सरकारी शिक्षकों ने राहत की सांस लेते हुए सभी को सावधान और सतर्क भी किया जा रहा है ताकि शिक्षक बिना डरे अपनी गरिमा की रक्षा करें। बताया गया है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय (BSA), आजमगढ़ का यह आधिकारिक आदेश सभी शिक्षक साथियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे ध्यान से पढ़ें और अपने पास सुरक्षित रख लें। अब यदि कोई यूट्यूबर, वेब-चैनल प्रतिनिधि या तथाकथित ‘सोशल मीडिया’ से जुड़ा व्यक्ति विद्यालय परिसर में आए तो प्रवेश ना करने दें।
कहा गया है कि बिना किसी आधिकारिक अनुमति/आदेश के प्रवेश करने की कोशिश करेंं। अनाधिकृत रूप से वीडियो या रील बनाने का प्रयास ना करें। सबसे पहले तो उन्हें विद्यालय परिसर में अनाधिकृत प्रवेश न करने दें। विभाग या सक्षम अधिकारी द्वारा जारी लिखित अनुमति/आदेश दिखाने को कहें। यदि कोई आधिकारिक आदेश न हो, तो उन्हें परिसर से बाहर जाने को कहें। इसके बाद भी यदि कोई न माने, तो नियमानुसार प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई करें।





