महाराष्ट्र सरकार ने 1,601 करोड़ में खरीदा एअर इंडिया भवन, नरीमन पॉइंट की 23 मंजिला इमारत में शिफ्ट होंगे दफ्तर

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित प्रतिष्ठित एअर इंडिया भवन का अधिग्रहण कर लिया है। यह सौदा 1,601 करोड़ रुपये में हुआ है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और किराये का खर्च कम होगा।

मुंबई/एजेंसी। मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित प्रतिष्ठित एअर इंडिया भवन अब औपचारिक रूप से महाराष्ट्र सरकार के स्वामित्व में आ गया है। यह अधिग्रहण इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मंत्रालय से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह इमारत लंबे समय तक भारत की राष्ट्रीय विमानन महत्वाकांक्षाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की प्रतिष्ठा का प्रतीक बनी रही थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को महाराष्ट्र लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और एअर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड के बीच “डीड ऑफ सरेंडर” पर हस्ताक्षर प्रक्रिया की अध्यक्षता की, जिसके साथ ही भवन का स्वामित्व राज्य सरकार को हस्तांतरित हो गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले तथा पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई भी उपस्थित रहे।
करीब 1,601 करोड़ रुपए में संपन्न हुए इस सौदे को केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में मंजूरी दी थी, जबकि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने नवंबर 2025 में इसे अंतिम स्वीकृति प्रदान की थी। अरब सागर के किनारे स्थित प्रसिद्ध मरीन ड्राइव (क्वीन्स नेकलेस) के सामने खड़ी 23 मंजिला यह इमारत पिछले पांच दशकों से अधिक समय से मुंबई की पहचान का हिस्सा रही है।
देश के पहले केंद्रीय व्यावसायिक जिले नरीमन प्वाइंट के हृदयस्थल में स्थित यह भवन कभी एअर इंडिया के मुख्यालय के रूप में जानी जाती थी,और नागरिक उड्डयन के स्वर्णिम दौर में देश की प्रमुख विमानन कंपनी की प्रतिष्ठा का प्रतीक मानी जाती थी। यह अधिग्रहण केवल एक रियल एस्टेट सौदा नहीं, बल्कि मुंबई के बदलते आर्थिक और संस्थागत परिदृश्य का भी द्योतक है। 1970 और 1980 के दशक में भारत के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र के रूप में उभरे नरीमन प्वाइंट से समय के साथ अनेक कॉर्पोरेट मुख्यालय बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी), लोअर परेल और पवई जैसे नए व्यावसायिक केंद्रों की ओर स्थानांतरित हो गए। एअर इंडिया भवन का सरकारी अधिग्रहण इस क्षेत्र के विकास के नए अध्याय का संकेत देता है, जहां कभी कॉर्पोरेट जगत का वर्चस्व था और अब सार्वजनिक प्रशासन की मौजूदगी बढ़ रही है।
महाराष्ट्र सरकार इस भवन का उपयोग उन विभिन्न विभागों और कार्यालयों के लिए करेगी, जो वर्तमान में मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल किराये पर होने वाला नियमित खर्च कम होगा, बल्कि मंत्रालय और विधान भवन के निकट विभिन्न विभागों के एकत्र होने से प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी। यह भवन मंत्रालय, नए प्रशासनिक भवन और विधान भवन परिसर से बेहद कम दूरी पर स्थित है, जिससे यह राज्य की प्रशासनिक गतिविधियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन जाता है। वर्ष 1974 में समुद्र को पाट कर (रिक्लेम्ड) भूमि पर निर्मित इस भवन को महाराष्ट्र सरकार ने एअर इंडिया को पट्टे पर दिया था।
इसका डिजाइन न्यूयॉर्क स्थित जॉनसन/बर्गी आर्किटेक्ट्स के प्रसिद्ध वास्तुकार जॉन बर्गी ने तैयार किया था। अरब सागर की ओर मुख किए इसकी विशिष्ट संरचना ने इसे देश की सर्वाधिक चर्चित और चित्रित व्यावसायिक इमारतों में शामिल कर दिया। एअर इंडिया ने वर्ष 2013 में परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना के तहत यह भवन खाली कर दिया था और अपना कॉर्पोरेट मुख्यालय नई दिल्ली स्थानांतरित कर लिया था। इसके बाद कई संस्थानों की रुचि के बावजूद इस संपत्ति के मुद्रीकरण के प्रयास लंबे समय तक सफल नहीं हो सके।
शुरुआत में एअर इंडिया ने इस संपत्ति के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की मांग की थी, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने 1,400 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। अन्य दावेदारों में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) भी शामिल थे, लेकिन बिक्री प्रक्रिया वर्षों तक अटकी रही।
गतिरोध तब टूटा जब तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 1,601 करोड़ रुपये की संशोधित पेशकश के साथ-साथ अवास्तविक पट्टा आय और ब्याज से जुड़े लगभग 300 करोड़ रुपये के बकाये को माफ करने का प्रस्ताव दिया। उस समय उपमुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस ने भी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर महाराष्ट्र सरकार की बोली को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।

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