पश्चिम बंगाल में 5 रुपये में मछली-चावल और स्कूल-मंदिरों के पास शराबबंदी; सीएम शुभेंदु का बड़ा एलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई कल्याणकारी उपायों की घोषणा की है, जिनमें 5 रुपये में मछली-चावल भोजन और महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता शामिल है।

कोलकाता/एजेंसी। बंगाल में हुए बड़े राजनैतिक और प्रशासनिक बदलाव के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नदिया जिले के कल्याणी में आयोजित एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के बाद पार्टी चुनावी घोषणा पत्र यानी संकल्प पत्र पर अमल और तेज कर दिया है और उन्होंने राज्य की सामाजिक और सुरक्षा व्यवस्था की रूपरेखा बदलने वाली कई बड़ी घोषणाएं की हैं। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बंद करने की अटकलों पर पूरी तरह विराम लगाते हुए भाजपा सरकार ने न केवल इन्हें जारी रखने का फैसला किया है, बल्कि कई योजनाओं का बजट और दायरा सीधे दोगुना कर दिया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि यह बदलाव ‘डबल इंजन’ सरकार के वास्तविक लाभ को जमीन पर उतारने के लिए है। इस प्रशासनिक बैठक में विपक्ष के कुछ सांसदों व विधायकों की मौजूदगी ने भी राज्य की बदली हुई राजनैतिक कार्यसंस्कृति की ओर इशारा किया है।
इस महा-घोषणा के तहत महिलाओं को मिलने वाली ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना (1500 रुपये) की राशि को दोगुना कर अब ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ के रूप में 3,000 रुपये मासिक कर दिया गया है। इसकी आधिकारिक प्रक्रिया बुधवार को नवान्न से फार्म जारी होने के साथ शुरू हो जाएगी, जिसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भरा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त किया है कि जब तक अन्नपूर्णा योजना की बढ़ी हुई राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचनी शुरू नहीं होती, तब तक पुरानी व्यवस्था के तहत उन्हें निरंतर भुगतान मिलता रहेगा। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार बीडीओ और स्थानीय विधायकों के नेतृत्व में घर-घर जाकर फॉर्म भरने में सहयोग करेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने नागरिकता के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि इन योजनाओं का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को मिलेगा, बांग्लादेशी घुसपैठियों को नहीं।
इसके साथ ही, राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की ‘मां कैंटीन’ को अपग्रेड करते हुए अब उसमें महज पांच रुपये में हफ्ते में दो दिन विशेष रूप से ‘मछली-भात’ परोसने का निर्णय लिया है, जबकि बाकी के पांच दिन पांच में ही अंडा-सब्जी,दाल और भात की पूर्ववर्ती सेवा जारी रहेगी। राज्य के लगभग 400 कैंटीनों के माध्यम से गरीब और दैनिक वेतनभोगियों को यह भोजन दिया जाएगा।
प्रशासनिक मोर्चे पर भी बड़े फेरबदल की घोषणा की गई है, जिसके तहत तृणमूल काल के ‘मुख्यमंत्री के बोलो’ और ‘दीदी के बोलो’ कार्यक्रमों को पूरी तरह बंद कर नए स्वरूप में ‘आपका सरकार से कहें’ नाम से लोक शिकायत मंच शुरू किया जा रहा है। इसके लिए एक नया टोल-फ्री नंबर भी जारी किया जाएगा, जिसका नामकरण भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने किया है।
एक अन्य महत्वपूर्ण और कड़े सामाजिक फैसले के तहत मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि छात्रों की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए अब राज्य में स्कूल, कालेज और मंदिरों के एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी शराब की दुकान को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने महिला यात्रियों के लिए बसों में मुफ्त यात्रा की कैबिनेट मंजूरी को लागू करने की भी बात कही, जिसके लिए फर्जीवाड़ा रोकने हेतु जल्द ही स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक जुलाई से ‘आयुष्मान भारत’ योजना लागू हो रही है, जिससे राज्य के नागरिकों को पांच लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवच मिलेगा। साथ ही, वैदिक चिकित्सा और केंद्रीय नीतियों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए ‘आयुष’विभाग को स्वास्थ्य मंत्रालय से अलग कर एक स्वतंत्र रूप दिया जा रहा है। जून के महीने में राज्य सरकार केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार पांच जून को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, 15 से 17 जून तक त्रिदिवसीय ‘जन कल्याण शिविर’ और 21 जून को व्यापक स्तर पर ‘विश्व योग दिवस’ का आयोजन करने जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में यह केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि “ममता मॉडल” के समानांतर “भाजपा मॉडल” खड़ा करने की शुरुआत है, जहां कल्याणकारी राजनीति, हिंदुत्व, सांस्कृतिक पहचान और महिला सशक्तीकरण को एक साथ जोड़कर नया सामाजिक समीकरण गढ़ने की कोशिश हो रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button