जिसकी एक आवाज पर थम जाते थे गांव-शहर! उसका शव लेने भी कोई नहीं आया
एक करोड़ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का लावारिस की तरह हुआ अंतिम संस्कार
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रांची/एजेंसी। वर्ष 1970 से 2020 तक झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में जिसकी एक आवाज पर गांव-शहर के लोग थम जाते थे, उसका शव करीब 72 घंटे तक अस्पताल के माॅर्चरी में पड़ा रहा। अंत में लावारिस की तरह प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार किया गया। माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे एक करोड़ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस उर्फ किशन दा कभी पांच राज्यों में खौफ और आतंक का दूसरा नाम था। उनकी एक आवाज पर माओवादी गुरिल्ला दस्ता के सदस्य पूर्वी भारत के किसी भी हिस्से में बड़ी से बड़ी घटना को अंजाम देने को तैयार रहते थे। लेकिन जब मौत हुई, तो पार्थिव शरीर रिम्स में घंटों लावारिस पड़ा रहा है।
रांची जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को माओवादी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का अंतिम संस्कार कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब जेल में बंद उनकी पत्नी शीला हंसदा ने कहा कि उनका कोई रिश्तेदार नहीं है। हालांकि कोलकाता से आए कुछ लोग प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का शव लेने पहुंचे थे, लेकिन वो किशन दा से अपने रिश्ते को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। प्रशांत बोस की पिछले हफ्ते सरकारी अस्पताल रिम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि अंतिम संस्कार की रस्में हरमू स्थित मुक्तिधाम में पूरी की गईं। इससे पहले, कुछ लोग बोस का रिश्तेदार होने का दावा करते हुए उनका शव लेने के लिए प्रशासन के पास आए थे, लेकिन उनके दावों की सत्यता साबित नहीं हो सकी।
माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे प्रशांत बोस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उन्हें 12 नवंबर 2021 को उनकी पत्नी के साथ सरायकेला-खरसावां ज़िले से गिरफ्तार किया गया था। तब से, वे दोनों बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद थे। 3 अप्रैल को बोस की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ले जाया गया, लेकिन वहां उनका निधन हो गया।
प्रशासन जहां शव लेने के लिए किसी रिश्तेदार का इंतजार कर रहा था, वहीं उनकी पत्नी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने कहा कि बोस का कोई भी पारिवारिक सदस्य जीवित नहीं है, इसलिए प्रशासन को ही अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करनी चाहिए।




